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उस्मान ख्वाजा का खुलासा: 22 साल की उम्र में हुई थी गंभीर बीमारी, चलना भी हो गया था मुश्किल; वर्षों तक लड़ी जंग

Mon, 26 Oct 2026 03:33 PM IST
मयंक त्रिपाठी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने खुलासा किया है कि वह अपने पूरे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर के दौरान रूमेटाइड आर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझते रहे।
  • 22 साल की उम्र में इस बीमारी का पता चलने के बाद उनके लिए चलना भी मुश्किल हो गया था। ख्वाजा ने दवाओं की मदद से वापसी की और अपनी बीमारी को वर्षों तक टीम के साथियों से छिपाकर रखा।
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उस्मान ख्वाजा - फोटो : ANI/ICC
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विस्तार
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ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने अपने क्रिकेट करियर से जुड़ा एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वह अपने पूरे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान रूमेटाइड आर्थराइटिस (गठिया का एक प्रकार) से जूझते रहे, लेकिन इस बीमारी के बारे में उन्होंने किसी को नहीं बताया। जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अब उन्होंने पहली बार इस संघर्ष को सार्वजनिक किया है।
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22 साल की उम्र में हुई बीमारी
ख्वाजा को महज 22 साल की उम्र में इस बीमारी का पता चला था। उस समय वह न्यू साउथ वेल्स की ओर से खेल रहे थे और पेशेवर क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे। बीमारी के कारण उनके बाएं घुटने में तेज दर्द रहने लगा था। हालत इतनी खराब हो गई थी कि उनके लिए कुछ कदम चलना भी मुश्किल हो गया था।

उस्मान ख्वाजा - फोटो : PTI
'मुझे सच में लगा था कि मैं मर जाऊंगा'
  • ख्वाजा ने ऑस्ट्रेलियाई कार्यक्रम 'ऑस्ट्रेलियन स्टोरी' में अपने संघर्ष के बारे में बात करते हुए बताया कि बीमारी ने उनकी जिंदगी को किस तरह प्रभावित किया था। उन्होंने कहा, 'मुझे सच में लगा था कि मैं मर जाऊंगा। मैं एक ऐसा एथलीट था, जो पेशेवर क्रिकेट खेल रहा था, लेकिन हालत ऐसी हो गई थी कि मैं बाथरूम तक 10 मीटर चलकर भी नहीं जा सकता था।'
  • ख्वाजा ने कहा कि वह अपनी कहानी इसलिए साझा करना चाहते हैं, ताकि ऑटोइम्यून बीमारियों से जूझ रहे लोगों को हौसला मिल सके। उन्होंने कहा, 'अगर रूमेटाइड आर्थराइटिस के साथ कोई व्यक्ति पेशेवर क्रिकेट में शीर्ष स्तर पर खेल सकता है, तो मुझे लगता है कि दूसरे लोग भी बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं।'
  • उन्होंने यह भी बताया कि बीमारी के निदान के बाद दवाओं ने उन्हें दोबारा क्रिकेट खेलने में मदद की। ख्वाजा के मुताबिक, 'उस दवा के बिना मैं शायद दोबारा कभी क्रिकेट नहीं खेल पाता और न ही सामान्य जिंदगी जी पाता।'

वर्षों तक छिपाकर रखी बीमारी
ख्वाजा को 2009 के ऑफ सीजन में इस बीमारी का पता चला था। उन्होंने डॉक्टरों, कोच और क्रिकेट अधिकारियों को अपनी स्थिति के बारे में बता दिया था, लेकिन टीम के साथियों से इसे छिपाकर रखा। वह नहीं चाहते थे कि बीमारी के कारण उन्हें टीम में कोई विशेष रियायत मिले। उन्हें यह भी डर था कि विरोधी खिलाड़ी या आलोचक उनकी बीमारी का इस्तेमाल उनके खिलाफ कर सकते हैं। यही वजह रही कि उनके करीबी साथी भी इस संघर्ष से अनजान रहे। इनमें उनके बचपन के क्रिकेट साथी डेविड वॉर्नर और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर माइकल हसी भी शामिल थे। ख्वाजा ने बताया कि नियमित रूप से दवा के इंजेक्शन लेने के बाद वह करीब छह महीने में दोबारा मैदान पर लौटने में सफल रहे। इस उपचार ने उनके क्रिकेट करियर को जारी रखने में अहम भूमिका निभाई।

उस्मान ख्वाजा - फोटो : PTI
कई बार टीम से बाहर हुए, फिर की दमदार वापसी
ख्वाजा ने जनवरी 2011 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। वह टेस्ट क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करने वाले पाकिस्तान में जन्मे पहले खिलाड़ी बने। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। उन्हें कई बार ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम से बाहर किया गया, लेकिन उन्होंने हर बार वापसी की। उनकी सबसे यादगार वापसी 2021-22 की एशेज सीरीज के दौरान देखने को मिली, जब उन्होंने सिडनी टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाए। इसके बाद वह ऑस्ट्रेलिया की शीर्ष क्रम की बल्लेबाजी का अहम हिस्सा बन गए और लगातार अपने प्रदर्शन से टीम को योगदान देते रहे।
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ऐसा रहा ख्वाजा का टेस्ट करियर
उस्मान ख्वाजा ने अपने टेस्ट करियर में 88 मैच खेले और 6229 रन बनाए। उनके नाम 16 शतक दर्ज हैं। उन्होंने जनवरी 2026 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ एशेज सीरीज के पांचवें टेस्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। ख्वाजा अपनी आगामी आत्मकथा 'सब्र'  के जरिए भी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को प्रेरित करना चाहते हैं। उनकी कहानी बताती है कि मैदान पर मिली सफलताओं के पीछे कई बार ऐसी व्यक्तिगत चुनौतियां भी होती हैं, जिनके बारे में दुनिया को लंबे समय तक पता नहीं चल पाता।
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