Sanju Samson Comeback Story T20 World Cup 2026: टीम से बाहर होने और आलोचनाओं का सामना करने के बावजूद संजू सैमसन ने धैर्य नहीं खोया और मौके का इंतजार किया। जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत पड़ी, तब उन्होंने शानदार पारियों से टी20 विश्व कप में भारत की जीत की राह आसान कर दी और अपनी अहमियत साबित कर दी।
क्रिकेट सिर्फ रन, चौके और छक्कों का खेल नहीं है। यह इंतजार, संघर्ष, विश्वास और खुद पर भरोसा बनाए रखने की परीक्षा भी है। कई बार खिलाड़ी मैदान पर नहीं, बल्कि ड्रेसिंग रूम में बैठकर सबसे कठिन मुकाबला लड़ते हैं। संजू सैमसन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जहां निराशा, आलोचना और इंतजार के बाद आई एक ऐसी वापसी, जिसने पूरी दुनिया को उनका लोहा मानने पर मजबूर कर दिया।
हार मानने की बजाय खेल पर दिया ध्यान
टी20 विश्व कप से ठीक पहले टीम से बाहर होना, न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में बल्ले का खामोश रहना और लगातार उठती आलोचनाओं के बीच कई खिलाड़ी टूट जाते हैं। लेकिन सैमसन ने हार नहीं मानी। उन्होंने शोर नहीं मचाया, बयान नहीं दिए बस चुपचाप अपने खेल पर काम करते रहे और सही मौके का इंतजार करते रहे।
जब टी20 विश्व कप 2026 के दौरान भारतीय बल्लेबाज लड़खड़ाए, तब एक नाम बार-बार चर्चा में आने लगा, संजू सैमसन। और जब उन्हें दोबारा मौका मिला, तो उन्होंने बल्ले से ऐसा जवाब दिया कि आलोचक भी तालियां बजाने को मजबूर हो गए। उनकी वापसी सिर्फ रन बनाने की कहानी नहीं थी, बल्कि यह आत्मविश्वास, संयम और साहस की जीत की कहानी बन गई।
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संजू सैमसन
- फोटो : IANS
ईशान की वापसी के बाद मुश्किल में पड़ गई थी जगह
टी20 विश्व कप से ठीक पहले ईशान किशन की टीम में वापसी ने सैमसन के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थीं। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में सैमसन का बल्ला खामोश रहा और इसी कारण टीम मैनेजमेंट ने विश्व कप में ओपनिंग की जिम्मेदारी ईशान किशन और अभिषेक शर्मा को सौंप दी। ऐसा लगने लगा था कि सैमसन के लिए टीम के दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं। लेकिन क्रिकेट में किस्मत कब करवट ले ले, यह कोई नहीं जानता। जैसा कहा जाता है, भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। सैमसन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
जब मौका मिला तो दुनिया देखती रह गई
विश्व कप के पहले मैच में सैमसन बेंच पर बैठे रहे। इसके बाद नामीबिया के खिलाफ ग्रुप स्टेज मुकाबले में उन्हें खेलने का मौका मिला और उन्होंने सिर्फ 8 गेंदों में 22 रन बनाकर अपनी आक्रामक क्षमता की झलक दिखा दी। हालांकि, इसके बाद फिर बदलाव हुआ और वह एक बार फिर प्लेइंग-11 से बाहर हो गए। लेकिन जब भारतीय बल्लेबाजी लड़खड़ाने लगी और टीम को एक स्थिर शुरुआत की जरूरत महसूस हुई, तब टीम मैनेजमेंट ने जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्हें फिर मौका दिया। इस मैच में सैमसन ने भले ही 15 गेंदों में 24 रन बनाए, लेकिन अभिषेक शर्मा के साथ मिलकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई और यह संकेत दे दिया कि मौका मिला तो वह बड़ा असर छोड़ सकते हैं।
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सैमसन को बधाई देते हेटमायर
- फोटो : IANS
वेस्टइंडीज के खिलाफ दिखा असली सैमसन
इसके बाद आया करो-या-मरो का मुकाबला। सामने थी वेस्टइंडीज, वही टीम जिसने 2016 टी20 विश्व कप में भारत को सेमीफाइनल से बाहर किया था। इस बार भी दांव बड़ा था, जो जीतेगा वही सेमीफाइनल में जाएगा। भारत को 196 रन का मुश्किल लक्ष्य मिला। शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने जल्दी ही अभिषेक शर्मा और ईशान किशन के विकेट गंवा दिए। स्कोर 41 रन था और दबाव साफ दिखाई दे रहा था। ऐसे में सैमसन ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। उन्होंने पहले सूर्यकुमार यादव, फिर तिलक वर्मा, फिर हार्दिक पांड्या और आखिर में शिवम दुबे के साथ साझेदारियां करते हुए टीम को जीत की राह पर पहुंचा दिया। सैमसन ने 50 गेंदों में 12 चौकों और चार छक्कों की मदद से नाबाद 97 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 194 रहा और इसी शानदार पारी के दम पर भारत ने सेमीफाइनल का टिकट हासिल किया।
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संजू सैमसन
- फोटो : PTI
सेमीफाइनल में भी गरजा सैमसन का बल्ला
सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला इंग्लैंड से था। दबाव फिर बड़ा था, लेकिन सैमसन के आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं थी। उन्होंने 42 गेंदों पर आठ चौकों और सात छक्कों की मदद से 89 रन बनाए और भारत की जीत की मजबूत नींव रखी। भले ही वह शतक से चूक गए, लेकिन टी20 विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में सबसे बड़े स्कोर बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में उनका नाम दर्ज हो गया। इस दौरान उन्होंने विराट कोहली के उस रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली, जिसमें कोहली ने 2016 के सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 89 रन बनाए थे।
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संजू सैमसन
- फोटो : PTI
फाइनल में भी गूंजा सैमसन का शोर
फाइनल में भारत का सामना न्यूजीलैंड से हुआ और एक बार फिर सैमसन ने अपने बल्ले की ताकत दिखाई। अहमदाबाद में खेले गए इस बड़े मुकाबले में उन्होंने शानदार अर्धशतक लगाया, जो इस टूर्नामेंट में उनका लगातार तीसरा पचासा था। सैमसन टी20 विश्व कप के एक संस्करण में सेमीफाइनल और फाइनल दोनों में अर्धशतक लगाने वाले तीसरे बल्लेबाज बन गए। उनसे पहले विराट कोहली (2014) और शाहिद अफरीदी (2009) यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। पूरे टूर्नामेंट में सैमसन ने 21 छक्के लगाए, जो भारत की ओर से सबसे ज्यादा रहे। फाइनल मुकाबले में ही उन्होंने आठ छक्के जड़कर यह साबित कर दिया कि दबाव के सबसे बड़े मंच पर भी उनका बल्ला उतनी ही ताकत से बोलता है।
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संजू सैमसन
- फोटो : PTI
आलोचना से तालियों तक का सफर
संजू सैमसन की यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की वापसी नहीं है। यह उस धैर्य की कहानी है जो आलोचनाओं के बीच भी टूटता नहीं, उस आत्मविश्वास की कहानी है जो मौके का इंतजार करता है और उस साहस की कहानी है जो सही समय आने पर दुनिया को जवाब देता है। टीम से बाहर होने से लेकर विश्व कप के सबसे अहम मुकाबलों में नायक बनने तक, सैमसन ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो हर ठोकर आगे बढ़ने की ताकत बन जाती है।
तीसरी बार विजेता बना है भारत
भारतीय टीम तीन बार टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम कर चुकी है। भारत ने 2007 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में पाकिस्तान को हराकर खिताब अपने नाम किया था। वहीं, 2024 में टीम ने रोहित शर्मा की अगुआई में दक्षिण अफ्रीका को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की थी। अब भारत ने सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में न्यूजीलैंड को हराकर तीसरी बार खिताब जीत लिया है। टूर्नामेंट के इतिहास में अब तक कोई भी टीम खिताब का बचाव नहीं कर सकी थी, लेकिन भारत ने यह कारनामा करके दिखाया।