जिस प्रकार समय और स्थान स्थिर नहीं हैं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं। ठीक उसी तरह, तकनीक भी कोई स्थिर संरचना नहीं, बल्कि निरंतर परिवर्तनशील प्रक्रिया है। जब व्यक्ति इस मानसिकता को अपनाता है, तो वह हर समस्या को नए दृष्टिकोण से देखने लगता है। इससे वह ऐसे समाधानों तक पहुंचता है, जिन्हें आमतौर पर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। तकनीक की मदद से जटिल से जटिल सिद्धांत भी सरल बनाए जा सकते हैं, बशर्ते सोच स्पष्ट और व्यवस्थित हो।
आधुनिक तकनीक का विकास इस बात पर आधारित है कि जटिल चीजों को आसान बनाया जाए, ताकि तकनीक सिर्फ विशेषज्ञों तक ही सीमित न रहे, बल्कि आम लोगों तक भी पहुंच सके। इसी से ज्ञान का असली उद्देश्य भी समझ में आता है। दरअसल, जब ज्ञान सभी के लिए आसान और सुलभ होता है, तो वह नई कल्पनाओं को जन्म देता है। तभी यह समझ में आता है कि कल्पना, ज्ञान से अधिक शक्तिशाली हो सकती है, क्योंकि ज्ञान की अपनी सीमाएं हैं, पर कल्पनाओं की नहीं। जब कोई व्यक्ति यह कल्पना करता है कि दुनिया को अलग तरीके से कैसे देखा जा सकता है, तभी नए विचार पैदा होते हैं। यही विचार नई तकनीकों का रूप लेते हैं, क्योंकि हर महान आविष्कार की शुरुआत एक कल्पना से ही होती है। इसलिए, तकनीक के क्षेत्र में केवल जानकारी का होना पर्याप्त नहीं, बल्कि रचनात्मकता और कल्पनाशीलता भी उतनी ही जरूरी है।
जब गुरुत्वाकर्षण को केवल एक बल के रूप में देखने के बजाय समय और स्थान के वक्र के रूप में समझा गया, तो यह एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हुआ। इससे यह साबित हुआ कि अगर हम अपना नजरिया बदलें, तो चीजों को समझने का तरीका भी बदल जाता है और यही सोच नए तकनीकी आविष्कारों की ताकत है। वास्तव में, तकनीक इन्सानी सोच का ही नतीजा है, और जो लोग बिना डरे नया सीखने और कोशिश करने का साहस रखते हैं, वही तकनीक के जरिये दुनिया को बदलने की क्षमता रखते हैं।