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दूसरा पहलू: जहां सूरज नहीं पहुंचता, वहां पहुंचेंगे इंसान

Wed, 09 Sep 2026 07:28 AM IST
निर्मल कांत एलेन द बॉटन

सार

चंद्रमा का वह हिस्सा, जहां सूर्य की किरणें अरबों वर्षों से नहीं पहुंचीं, अब वैज्ञानिकों के लिए पानी, बर्फ व मानव बस्तियों का सुराग बन रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : नासा
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विस्तार
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आप ऐसी जगह की खोज कैसे करेंगे, जहां सूर्य की रोशनी कभी नहीं पहुंचती? चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम जल्द ही चंद्रमा की खोज से जुड़ा एक ऐसा मिशन शुरू करने जा रहा है, जो हाल के वर्षों के सबसे नवीन और महत्वाकांक्षी चंद्र अभियानों में से एक हो सकता है।
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हम जानते हैं कि चंद्रमा पर पानी मौजूद है। पर, अब भी यह ठीक-ठीक पता नहीं कि वहां के गड्ढों में कितनी बर्फ है, वह कितनी गहराई में दबी है और किस रूप में मौजूद है। 1959 में सोवियत संघ के लूना-1 के चंद्रमा के आसपास पहुंचने के बाद से चंद्र अन्वेषण ने लंबा सफर तय किया है। इसी क्रम में चीन का चांग’ए-7 मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की ओर जाएगा। क्वेचियाओ-2 संचार उपग्रह भी पृथ्वी और चंद्रमा के बीच संपर्क बनाए रखने में मदद करेगा। मिशन का सबसे अनोखा हिस्सा हॉपर होगा। पहियों वाले पारंपरिक रोवर के बजाय यह ऊबड़-खाबड़ भू-भाग पर छलांग लगाकर आगे बढ़ सकेगा और उन गड्ढों में उतरने का प्रयास करेगा, जहां सूर्य की रोशनी कभी नहीं पहुंचती। नासा के एक कार्यक्रम के तहत निजी कंपनियां चंद्रमा तक वैज्ञानिक उपकरण व तकनीक पहुंचा रही हैं। इनमें इंट्यूटिव मशीन्स का आईएम-2 मिशन भी था। एथेना नाम के इस मिशन ने वाष्पशील पदार्थों की खोज, ड्रिलिंग, हॉपिंग वाहन और मोबाइल संचार जैसी तकनीकों का परीक्षण करने का प्रयास किया। चांग’ए-7 के बाद 2028 का चांग’ए-8 चंद्र संसाधनों के उपयोग की तकनीक प्रदर्शित करने की दिशा में अगला कदम होगा। इसके बाद मानवयुक्त चंद्र अन्वेषण अभियानों का चरण शुरू होने की संभावना है, जिसका लक्ष्य अंततः ‘इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन’ की स्थापना करना है। नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम भी चंद्रमा पर मानव गतिविधियों की नींव तैयार कर रहा है।

चंद्रमा तक पहुंचना 20वीं सदी की महान तकनीकी चुनौतियों में से एक था। चंद्रमा पर रहना और वहां काम करना सीखना 21वीं सदी की महान चुनौतियों में से एक हो सकता है।      
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-द कन्वर्सेशन
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