डोंडी ब्लॉक के ग्राम केशवपुर के ग्रामीणों ने वन अधिकार पट्टे के तहत मिली जमीन में कटौती और जमीन छीने जाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। केशवपुर पहले वन ग्राम था, जिसे अब राजस्व ग्राम घोषित किया गया है। इसके बाद नए सिरे से नक्शा तैयार किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले वन अधिकार पट्टे के तहत उन्हें अधिक जमीन दी गई थी, लेकिन नए नक्शे में उनकी जमीन कम कर दी गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वे वर्षों से इस जमीन पर काबिज हैं और अब उनकी जमीन छीनी जा रही है।
'हमें पहले वाली जमीन वापस दी जाए'
ग्रामीण महेश्वर गावड़े ने बताया, 'वन अधिकार पट्टे के तहत हमें पहले अधिक जमीन मिली थी, लेकिन नए नक्शे में इसे कम कर दिया गया है। हम मांग करते हैं कि हमें पहले वाली जमीन वापस दी जाए।' मोहित राम ताराम ने कहा, 'हम आदिवासी हैं, जल, जंगल और जमीन हमारा अधिकार है। हमें पहले से पट्टा मिला हुआ था, लेकिन अब सरकार इसे छीन रही है। हम इसका विरोध करने आए हैं।'
प्रशासन का पक्ष
जिले के अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक ने बताया कि सरकार ने सभी वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत नए सिरे से सर्वे और नक्शा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'यदि कोई कब्जे का मामला है, तो यह जांचा जा रहा है कि कब्जा कितने समय से है। 14 दिसंबर 2005 से पहले के कब्जे को विशेष रूप से ध्यान में रखा जा रहा है। किसी के साथ अन्याय न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।'