उपाध्यक्ष शर्मा ने इकाई में तैयार किए जा रहे उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने पाया कि यहां आंवला, बेल और जामुन जैसे वनोपजों से शुद्धता के साथ विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने गोदामों में भंडारित वनोपज, मिलेट्स फसलों की स्थिति और प्रसंस्करण के बाद उत्पादों के वितरण की व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया।
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित के उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा ने गुरुवार को दुर्ग जिले के पाटन विकासखण्ड के ग्राम जामगांव (एम) में स्थित केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई का दौरा कर, वहां चल रहे कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने इकाई की क्षमता, उत्पादन प्रक्रिया और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।
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ग्राम जामगांव (एम) में स्थापित यह केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से 110 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैली हुई है। इस इकाई में लघु वनोपजों के प्रसंस्करण के लिए विभिन्न संयंत्र स्थापित किए गए हैं। निरीक्षण के दौरान वनमण्डलाधिकारी, दुर्ग दीपेश कपिल (आईएफएस), दुर्ग वृत डिप्टी एमडी, बालोद जिले के डिप्टी एमडी और दुर्ग रेंजर सहित अन्य अधिकारी भी उपाध्यक्ष शर्मा के साथ मौजूद रहे।
उपाध्यक्ष शर्मा ने इकाई में तैयार किए जा रहे उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने पाया कि यहां आंवला, बेल और जामुन जैसे वनोपजों से शुद्धता के साथ विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने गोदामों में भंडारित वनोपज, मिलेट्स फसलों की स्थिति और प्रसंस्करण के बाद उत्पादों के वितरण की व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान, यज्ञदत्त शर्मा ने प्रसंस्करण संयंत्र का बारीकी से मुआयना किया। उन्होंने आंवला, बेल और जामुन जैसे मूल्यवान वनोपजों से निर्मित जूस, कैंडी, लच्छा और मुरब्बा जैसे विभिन्न तैयार हर्बल उत्पादों को भी देखा और उनकी सराहना की।
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उपाध्यक्ष शर्मा ने इस इकाई की स्थापना के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य छत्तीसगढ़ के समृद्ध वनोपज को पूरी दुनिया तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 75 प्रकार के वनोपजों का संग्रहण किया जाता है, जिससे 13 लाख 40 हजार से अधिक वनवासी परिवारों को सीधा लाभ मिलता है।