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Chandigarh News: शहर की प्लास्टिक इंडस्ट्री को भी चाहिए प्रसार

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ में प्लास्टिक उद्योग की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। जगह की कमी, गोदामों को मंजूरी न मिलना और प्रोडक्शन लागत में तेजी से बढ़ोतरी जैसी समस्याओं के कारण पिछले कुछ वर्षों में कई यूनिटें शहर से बाहर मोहाली, डेराबस्सी और पंचकूला की ओर शिफ्ट हो चुकी हैं। फिलहाल शहर में करीब 50 प्लास्टिक यूनिट्स ही बची हैं जिनमें लगभग 20 बड़ी और बाकी छोटी यूनिटें हैं।
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उद्यमियों का कहना है कि चंडीगढ़ में गोदाम बनाने की मंजूरी मिलना मुश्किल है और किराये पर गोदाम लेने पर भारी खर्च उठाना पड़ता है। इस वजह से इंडस्ट्री का विस्तार करना लगभग असंभव हो जाता है। दूसरी ओर, मोहाली व डेराबस्सी में सरकारी नियम और ढांचागत सुविधाएं कहीं अधिक अनुकूल हैं जहां इंडस्ट्री चलाना काफी आसान है।
शहर में क्या बन रहा है?
चंडीगढ़ की प्लास्टिक यूनिट्स में मुख्य रूप से ट्रैक्टर पार्ट्स के प्लास्टिक ढक्कन, प्लास्टिक पाइप, एचडीपी (हाई डेंसिटी पाइप), कंप्यूटर केबल पाइपिंग और विभिन्न प्रकार के लिफाफे का निर्माण किया जाता है।
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उद्यमियों की राय
मैं छोटे-छोटे आइटम बनवाता हूं। सामान ज्यादा होता है तो गोदाम जरूरी है लेकिन यहां गोदाम बनाना या किराये पर लेना दोनों ही मुश्किल हैं। इंडस्ट्री बढ़ना चाहती है पर नियम साथ नहीं देते। प्रशासन इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक नियम बदले तो सभी को फायदा होगा और शहर का रेवेन्यू भी बढ़ेगा। -राकेश कुमार तिवारी, उद्यमी
मैं हाई डेंसिटी पाइप लाइन का काम करता हूं लेकिन चंडीगढ़ में स्टोरेज की जगह न होने के कारण पाइप मोहाली में रखवाने पड़ते हैं। अगर मोहाली और डेराबस्सी में छूट दी जा सकती है तो चंडीगढ़ को भी नियमों में बदलाव करना चाहिए ताकि यहां के उद्यमियों को राहत मिले। -अमनदीप सिंह, सदस्य, लघु उद्योग भारती
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