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ढींढसा पिता-पुत्र ने बादलों के गृह जिले में लगाई सेंध, रूठे व नजरअंदाज नेताओं पर टिकी है नजर

Sat, 18 Jul 2020 11:10 AM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)

सार

  • ढींढसा के समक्ष पंथक सोच व पंजाब के हितों के बीच संतुलन बनाने की होगी चुनौती
  • बेअदबी, डेरा मुखी को माफी, खेती अध्यादेश मुद्दे पर बादल को घेरने की योजना
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सुखदेव ढींढसा, परमिंदर ढींढसा - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा, नई पार्टी शिरोमणि अकाली दल के कारवां को लगातार बढ़ाते हुए अकाली की सियासत में वर्चस्व कायम करने में जुट गए हैं। ढींढसा की ओर से बादल परिवार के गृह जिलों में सेंधमारी करके रूठे व नजरअंदाज नेताओं को अपने साथ जोड़ा जा रहा है। साथ ही माझा व दोआबा में कई नेताओं को नए दल में शामिल कर लिया है। सांसद ढींढसा का पहला निशाना एसजीपीसी चुनाव होंगे।
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गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी, डेरा मुखी को माफी और खेती अध्यादेश के मुद्दे उठाकर बादल परिवार को घेरना उनके प्राथमिक एजेंडे में है, लेकिन सांसद ढींढसा के समक्ष पंथक मुद्दों और पंजाब के हितों के दरमियान संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगा। सियासी जानकारों का मानना है कि पंथक सोच के अलावा तमाम पंजाबियों के हितों पर पहरा देने वाला सियासी दल ही पंजाब की राजनीति में पांव जमा सकेंगे।

पंथक मुद्दों के दम पर सिखों की सिरमौर संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के चुनाव में कड़ी टक्कर दी जा सकती है, जबकि पंजाब के हितों की रक्षा से जनमत हासिल किया जा सकता है। इन दोनों पहलुओं के दरमियान संतुलन बनाना ही सांसद ढींढसा के समक्ष किसी बडे़ चैलेंज से कम नहीं होगा। जानकार मानते हैं कि अगर सांसद ढींढसा इन पहलुओं में संतुलन बनाने में सफल रहे तो भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक दल से गठबंधन करने के विकल्प भी सुरक्षित रहेंगे। समय की नजाकत को भांपते हुए ढींढसा वक्त आने पर किसी भी दल के साथ समझौता कर सकते हैं।
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सियासी स्टैंड स्पष्ट किया

सांसद ढींढसा ने कहा कि नए शिरोमणि अकाली दल ने अपना सैद्धांतिक स्टैंड स्पष्ट कर दिया है कि एसजीपीसी चुनाव में उतरने वाले नेताओं को विधानसभा अथवा लोकसभा चुनाव में नहीं उतारा जाएगा। विस या लोस चुनाव लड़ने वाले एसजीपीसी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। साथ ही बादल दल और कांग्रेस को छोड़कर पंजाब व पंथ के हितों के लिए यदि कोई उनके साथ आना चाहता है तो उसका तहेदिल से स्वागत है। उनकी पार्टी पंथ व पंजाब के हितों पर पहरा देने से पीछे नहीं हटेगी। निजी स्वार्थों को किसी भी कीमत पर हावी नहीं होने दिया जाएगा।
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