चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों से एक एफिडेविट भरवाया जा रहा है जिसमें विद्यार्थियों को प्रदर्शन करने से पहले विवि प्रशासन से अनुमति लेने और तय जगह पर ही प्रदर्शन करने की शर्त रखी गई है। इससे विद्यार्थियों में विरोध है। इस एफिडेविट के विरोध में जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई), जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) और हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (एचसीयू) के विद्यार्थी भी शामिल हो गए हैं।
उन्होंने पीयू के विद्यार्थियों का समर्थन दिया है और अपनी-अपनी यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन करने की बात कही है। सभी विद्यार्थियों का कहना है कि इस एफिडेविट से विद्यार्थियों के कैंपस और संवैधानिक अधिकार को ही खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे बोलने की आजादी, सोचने की आजादी, गलत चीजों के खिलाफ आवाज उठाने की आजादी छीन ली जाएगी। पीयू प्रशासन संविधान का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहा है।
विद्यार्थियों के कैंपस अधिकार का सीधा उल्लंघन
विद्यार्थी यूनिवर्सिटी में आकर गलत सही की पहचान करना सीखता है। क्योंकि वह अलग-अलग जगह से आए बच्चों से मिलता है। उसे मालूम होता है कि जो वह बचपन से सुन रहा है वह गलत है। यदि अनावश्यक फीस बढ़ोतरी होगी, हॉस्टल की दिक्कत, टीचरों की कमी, सुरक्षा अव्यवस्था में खामी होगी तो वह अपने अधिकारों के लिए आवाज कैसे उठाएगा। यह सीधा विद्यार्थियों के कैंपस अधिकार का उल्लंघन है। यदि इसे वापस नहीं लिया जाता तो वे जेएनयू में इसका विरोध करेंगे। -नेहा, रिसर्च स्कॉलर जेएनयू
विद्यार्थी सवाल न उठाएं इसलिए पैदा किया जा रहा डर
हमारी यूनिवर्सिटी में ऐसे दो अंडरटेकिंग बनाए गए लेकिन वे मीटिंग में पास नहीं हुए। एफिडेविट के माध्यम से विद्यार्थियों की आवाज का दबाकर उनके अधिकार को खत्म किया जा रहा है ताकि वह देश दुनिया के मुद्दों और अपने कैंपस की असुविधाओं पर सवाल न उठा सकें। यह डर का माहौल पैदा करने और स्टूडेंट्स एक्टिविज्म को खत्म करने की कोशिश है। यदि इस एफिडेविट को वापस नहीं लिया गया तो पीयू विद्यार्थियों के हक में आवाज बुलंद करेंगे। -सौरभ, जेएमआई
अंग्रेजों का दौर आ रहा है वापस
कहने को हम आजादी के दौर में हैं, लेकिन यूनिवर्सिटियों में हो रहे इस तरह के कदमों से लगता है कि अंग्रेजों का दौर वापस आ रहा है। लोगों के मौलिक अधिकारों को छीनने की कोशिश की जा रही है। पीयू प्रशासन को संविधान का अनुच्छेद 19 पढ़ना चाहिए और इस हलफनामे को तुरंत वापस लेना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो हम हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में इसके खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। विद्यार्थियों की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा।-सिद्धांत, एचसीयू