...जब चार जगुआर को शिकस्त दे गए दो मिग
मिग-21 आज भी ताकतवर हैं मगर हर विमान की एक उम्र होती है। मिग-21 ने तो आसमान में अपनी उम्र से कुछ ज्यादा ही जिंदगी जी है। बूढ़ा हो गया लेकिन लड़ाकू कौशल कम नहीं हुआ। यही संदेश देने के लिए आसमान में एक कॉम्बैट फ्लाइंग ड्रिल पेश की गई। इसमें दो मिग-21 को चार जगुआर विमानों से भिड़ना था। यह नजारा दांतों तले अंगुली चबाने के लिए मजबूर करने वाला था। दोनों मिग विमान आसमान में निगरानी में तैनात हैं, तभी अचानक चार जगुआर उनकी टेरिटरी में प्रवेश कर जाते हैं। आसमान में ही जगुआर विमानों की घेराबंदी कर मिग-21 ने दिखा दिया कि भले ही जा रहे हैं मगर दम अभी बाकी है। इसी दौरान वायुसेना के राजदूत कहे जाने वाली सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम के हॉक एमके-132 विमानों ने भी आसमान में तिरंगा छटा बिखेरते हुए हैरतअंगेज कारनामे दिखाए। मिग को दिल से विदाई देने के लिए आसमान में धुएं से हार्ट एरो भी बनाया गया। उधर आगरा से पहुंची आकाशगंगा टीम के जांबाज स्काई डाइवर्स ने 8000 फीट पर उड़ रहे एएन-32 विमान से कूदकर मिग-21 को स्काई सैल्यूट किया।
रक्षा मंत्री ने जारी की मिग-21 की डाक टिकट
एयर शो के बाद छह मिग विमानों को वाटर कैनन सैल्यूट दिया गया। सभी छह मिग विमान मंच के पास पहुंचे और हमेशा के लिए स्विच ऑफ हो गए। पायलटों ने अपने-अपने विमानों का आखिरी बार निरीक्षण किया और मिग-21 की पुरानी फिटनेस रिपोर्ट व पायलटों की फीडबैक से संबंधित दस्तावेज फार्म-700 के रूप से किताब एयरफोर्स चीफ एपी सिंह को सौंप दी गई। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सभी पायलटों से मिले और उनका हौसला बढ़ाया। रक्षामंत्री ने मिग-21 की एक ऐतिहासिक डाक टिकट जारी की और इस लड़ाकू विमान की यादों को सहेजकर रखने के लिए यहां बनाई गई मेमोरी लेन का अवलोकन भी किया।