दूरसंचार विभाग (डॉट) ने रिलायंस जियो को नेटवर्क उपलब्ध नहीं कराने मामले में वोडाफोन आइडिया (वीआईएल) और भारती एयरटेल पर 3,050 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
एयरटेल का विरोध- आरोप बेबुनियाद, अनुचित मांग को देंगे चुनौती
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की पांच साल पुरानी सिफारिश के आधार पर दोनों कंपनियों पर जुर्माना लगाया गया है। उधर, एयरटेल ने आदेश को चुनौती देने की बात कही है।
कंपनियों पर रिलायंस जियो को नेटवर्क उपलब्ध नहीं कराने का आरोप
एक सूत्र ने कंपनियों को दिए गए डिमांड नोटिस से जुड़ी सामग्री साझा करते हुए बताया कि विभाग ने दोनों कंपनियों को तीन सप्ताह में जुर्माना भरने को कहा है। इस संबंध में भारती एयरटेल के प्रवक्ता ने कहा कि यह आरोप बेबुनियाद है। हम एक नए परिचालक (जियो) को प्वाइंट ऑफ इंटरकनेक्ट के प्रावधानों से जुड़ी 2016 की ट्राई की सिफारिशों के आधार पर मनमानी और अनुचित मांग से निराश हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनी अनुपालन के उच्च मानकों को बनाए रखने में गर्व महसूस करती है और हमेशा देश के कानून का पालन करती है। इसलिए हम मांग को चुनौती देंगे और हमारे पास उपलब्ध कानूनी विकल्पों को आगे बढ़ाएंगे। हालांकि, वोडा आइडिया ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।
जियो ने की थी शिकायत
दरअसल, ट्राई ने जियो को इंटर कनेक्टिविटी (नेटवर्क) देने से इनकार करने के लिए अक्तूबर, 2016 में वोडाफोन, आइडिया और एयरटेल पर कुल 3,050 करोड़ रुपये जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी। जियो ने इस संबंध में दूरसंचार नियामक से शिकायत की थी, जिसमें कहा था कि पर्याप्त संख्या में इंटरफेस (पीओआई) जारी नहीं होने के कारण उसके नेटवर्क पर 75 फीसदी से अधिक कॉल नहीं लग रही थीं।
इसके बाद ट्राई ने इन कंपनियों पर जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी। हालांकि, ग्राहकों की असुविधा को देखते हुए उस समय दूरसंचार लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश नहीं की थी। दूरसंचार विभाग की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था डिजिटल संचार आयोग ने जुलाई, 2019 में इस जुर्माने को मंजूरी दी थी।