फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीएमआई की रिपोर्ट: पश्चिम एशिया की जंग का भारत पर असर, निवेश-जीडीपी और खपत पर कितना बढ़ेगा दबाव? जानिए सबकुछ

Wed, 04 Mar 2026 05:38 AM IST
Shubham Kumar अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी

सार

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध भारत की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकता है। बीएमआई रिपोर्ट के अनुसार, तेल कीमतों में 10% उछाल से जीडीपी 0.3-0.6% तक घट सकती है। भारत 88% कच्चा तेल आयात करता है और आधी आपूर्ति होर्मुज मार्ग से आती है। आपूर्ति बाधित हुई तो आयात बिल, महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ेगा। क्या इससे निवेश और खपत पर बड़ा झटका लगेगा?

Register For Event
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम एशिया में युद्ध जारी रहने से भारत में निवेश और जीडीपी पर नकारात्मक असर पड़ेगा। साथ ही, यह युद्ध यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों से मिलने वाले सकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक प्रभावित कर सकता है। फिच समूह की इकाई बीएमआई ने मंगलवार को जारी इंडिया आउटलुक रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध जारी रहने से निवेश धारणा प्रभावित हो सकती है, जिसके चलते मार्च से अनिश्चितता में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका है। अपनी जरूरतों का करीब 88 फीसदी क्रूड आयात करने वाले भारत में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे देश के आयात बिल में इजाफा होगा और ईंधन महंगाई पर दबाव बढ़ेगा।

विज्ञापन


रिपोर्ट के मुताबिक, भारत क्रूड जरूरतों के लिए आयात पर अधिक निर्भर है और देश होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से अपनी आवश्यकता का करीब आधा कच्चा तेल मंगाता है। अगर इस मार्ग से आपूर्ति में बाधा आई, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे आम आदमी और कंपनियों पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, अधिक व्यापार घाटा और ज्यादा महंगाई से आमतौर पर खपत एवं निवेश प्रभावित होगा, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी बड़ा झटका लग सकता है।

ये भी पढ़ें:- पश्चिम एशिया में तबाही: ईरान के राष्ट्रपति भवन पर इस्राइल का हमला, तेहरान ने भी अमेरिकी दूतावास पर दागे ड्रोन
विज्ञापन


कच्चे तेल में 10 फीसदी की तेजी से 0.6 फीसदी तक घट जाएगी जीडीपी
बीएमआई ने रिपोर्ट में कहा, अगर ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 10 फीसदी की बढ़ोतरी होती है, तो इससे भारत के जीडीपी पर करीब 0.3 से 0.6 फीसदी तक का नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा, दक्षिण एशिया जैसे शुद्ध तेल आयातक देशों पर भी इस संकट का अधिक प्रभाव पड़ने का अनुमान है। शोध एवं विश्लेषण इकाई बीएमआई ने अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7 फीसदी पर बरकरार रखा है, जो चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 7.9 फीसदी से कम है।

जहाजों को चुकाना होगा अधिक बीमा प्रीमियम- विशेषज्ञ
पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों से गुजरने पर मालवाहक जहाजों को अब अतिरिक्त बीमा प्रीमियम चुकाना होगा। पॉलिसीबाजार के प्रमुख (समुद्री बीमा) बालसुंदरम आर ने कहा, कच्चे तेल और एलएनजी के परिवहन में शामिल शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) के जहाजों की लाल सागर जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से गुजरने पर युद्ध जोखिम कवरेज हासिल करने पर लागत बढ़ सकती है। इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के हरि राधाकृष्णन ने कहा, कुछ मामलों में प्रीमियम दर 0.25–0.5 फीसदी से बढ़कर लगभग एक फीसदी तक पहुंच गई हैं। इससे ढुलाई लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और वैश्विक व्यापार प्रवाह पर असर पड़ेगा।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- Cyprus: ब्रिटिश मिलिट्री बेस की वजह से साइप्रस फिर बना पश्चिम एशिया युद्ध का निशाना, ड्रोन हमले से बढ़ी चिंता

बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने क्या कहा?

बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने कहा कि युद्ध जोखिम एवं हड़ताल, दंगे और नागरिक अशांति कवर के लिए बीमा कंपनियां आमतौर पर तीन से सात दिन के नोटिस पर कवरेज रद्द कर सकती हैं। बीमा कवरेज रद्द होने के बाद नया युद्ध जोखिम कवर उपलब्ध भी होता है, तो उसकी कीमत काफी अधिक हो सकती है। प्रूडेंट इंश्योरेंस ब्रोकर्स के गौरव अग्रवाल ने कहा, जहाज पर युद्ध कवरेज रद्द करने का नोटिस जारी किया गया है। मालवाहक बीमा पर भी जल्द ऐसा कदम उठाया जा सकता है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें