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Crude Oil Prices: क्या कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से महंगाई की चिंता कम हुई? जानें विशेषज्ञों की राय

Tue, 22 Sep 2026 04:55 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से महंगाई की चिंताएं कम हुईं और फेड द्वारा सख्ती से ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें भी कम हुई हैं। इस बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है, आइए जानते हैं विस्तार से।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को गिरावट आई और यह 98 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई। हालांकि बाद में इसमें थोड़ी रिकवरी देखने को मिली। कच्चे तेल कीमतों में आई नरमी अमेरिका और ईरान के बीच संभावित राजनयिक संबंधों में सुधार की खबरों से बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम कम होने की संभावना की वजह से आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है, कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से महंगाई की चिंताएं कम हुईं और फेड द्वारा सख्ती से ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें भी कम हुई हैं। 

पिछले चार सत्रों में तेल की कीमतों में कितनी गिरावट आई?

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी विशेषज्ञ मानव मोदी बताते हैं,  पिछले चार सत्रों में तेल की कीमतों में 9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। इसकी वजह सऊदी अरब से तेल का निर्यात बढ़ना और अमेरिका व ईरान के बीच कूटनीतिक प्रगति की उम्मीदें हैं। इससे ऊर्जा-जनित महंगाई का दबाव कुछ कम हुआ है, जिसने फेड द्वारा हाल ही में ब्याज दरें बढ़ाने में भूमिका निभाई थी। फेड ने पिछले हफ्ते ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर उन्हें 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में पहुंचा दिया था। साथ ही, नीति-निर्माताओं ने संकेत दिया है कि महंगाई के लक्ष्य से ऊपर बने रहने के कारण आगे भी सख्ती की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो एनर्जी की कम कीमतों में वृद्धि होने की संभावना कम है।

क्या कूटनीतिक प्रगति की उम्मीदें बढ़ी हैं?

उन्होंने कहा कि, फेड अधिकारी सतर्क हैं और कुछ पॉलिसी बनाने वालों का कहना है कि सप्लाई में लगातार आ रही रुकावटों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मिलने की इच्छा जताई है, जिससे कूटनीतिक प्रगति की उम्मीदें बढ़ी हैं, हालांकि मध्य पूर्व में तनाव अभी भी बना हुआ है। सबकी नजरे अमेरिका-चीन के बीच होने वाली बातचीत पर भी हैं, जबकि तेल की कीमतों, ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और रियल रेट्स में होने वाले बदलाव सोने की कीमतों पर असर डालने वाले मुख्य कारक बने रहेंगे।

शिपिंग में स्थिरता और सप्लाई से जुड़ी चिंताओं कितनी कमी आई?

वेंचुरा में कमोडिटी और सीआरएम के हेड, एन एस रामास्वामी कहते हैं, ट्रांजिट रूट पर फिर से कुछ समय के लिए शांति है और जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम कम होने के साथ कच्चे तेल की कीमतें भी नरम हो रही हैं। शिपिंग में स्थिरता और सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के कम होने से, "वॉर रिस्क प्रीमियम" का असर भी कम हो रहा है। कच्चे तेल की कीमतें अभी एक करेक्शन के दौर से गुजर रही हैं; कच्चे तेल 100–104 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 92–97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। अब मार्केट का नजरिया पैनिक बाइंग से बदलकर 'इंतज़ार करो और देखो' (वेट एंड वॉच) वाला हो गया है। कीमतों में यह बदलाव किसी फिजिकल डिमांड की वजह से नहीं, बल्कि इंटरनेशनल डिप्लोमेसी से जुड़ी खबरों पर प्रतिक्रिया के कारण है। ग्लोबल स्टॉक में भारी कमी के कारण फिजिकल इन्वेंट्री का स्तर अभी भी काफी कम बना हुआ है।

भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों पर असर डालने वाले क्या कारण?

रामास्वामी कहते हैं, निकट भविष्य में असर डालने वाले कारक में होर्मुज जलडमरूमध्य  की स्थिति और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक या सैन्य तनाव मुख्य होंगे। आज यूएन जनरल असेंबली में होने वाली बातचीत को लेकर उम्मीदें बनी हुई है, वहीं  ओपेक+ के अंदर उत्पादन में बदलाव और आउटपुट पॉलिसी से जुड़े फैसले। खाड़ी देशों के उत्पादकों से असल एनर्जी एक्सपोर्ट आश्चर्यजनक रूप से मजबूत बना हुआ है। समुद्री रास्ते से कच्चे तेल की रिकवरी और इन्वेंट्री (स्टॉक) को फिर से भरने की गति और सऊदी अरब के सप्लायर्स का रुकावटों से उबरना इस बात का संकेत है कि स्पॉट मार्केट में तंगी (सप्लाई की कमी) के कारण कीमतों में तेजी की संभावना कम हो रही है।

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 वैश्विक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख से अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है, जिससे डॉलर में कीमत तय होने वाले कच्चे तेल पर उल्टा दबाव पड़ रहा है। "क्रैक स्प्रेड" (कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों के बीच का मार्जिन) ने कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद की है, लेकिन डीजल और गैसोलीन की कीमतों पर रिफाइनिंग की कमी का असर बहुत ज्यादा है और रिफाइंड उत्पादों की मांग भी काफी अधिक है।

तेल की कीमतों पर भविष्य के लिए क्या अनुमान?

ऐसे में उम्मीद है कि तेल की कीमतें एक दायरे में ही रहेंगी। निकट भविष्य में, ब्रेंट क्रूड यानी कच्चा तेल 90 से 95 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने का अनुमान है। अगर जियोपॉलिटिकल सप्लाई से जुड़े जोखिम पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं और तनाव कम होता है, तो डब्लयूटीआई की कीमतें 75 से 80 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती हैं। मध्यम अवधि में, सप्लाई के मांग से अधिक होने की उम्मीद है क्योंकि ग्लोबल इन्वेंट्री फिर से बढ़नी शुरू हो जाएगी, जिससे कीमतें कम रहने का संकेत मिलता है।

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