फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिजर्व बैंक: महंगाई व उपभोक्ताओं के भरोसे की पड़ताल के लिए आरबीआई ने शुरू किए तीन सर्वे, जानिए क्या फायदा

Tue, 08 Sep 2026 06:27 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या त्योहारों से पहले महंगाई से राहत मिलेगी? आरबीआई ने आगामी मौद्रिक नीति के नीतिगत फैसलों के लिए 19 शहरों और 31 राज्यों में तीन बड़े सर्वे लॉन्च किए हैं। पूरी रिपोर्ट पढ़ें और जानें क्या है आरबीआई का प्लान।
Register For Event
विज्ञापन
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश में महंगाई की उम्मीदों और उपभोक्ता विश्वास के आकलन के लिए तीन महत्वपूर्ण सर्वेक्षण शुरू किए हैं। मंगलवार को घोषित इन सर्वे का मकसद आगामी मौद्रिक नीति के लिए जमीनी आंकड़े जुटाना है। रिजर्व बैंक की अगली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के निर्णय 7 अक्तूबर को घोषित होने वाले हैं। ऐसे में नीतिगत दरों पर फैसला लेने से पहले केंद्रीय बैंक जनता की नब्ज टटोल रहा है, ताकि फैसले आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप हों। 

विज्ञापन


आरबीआई द्वारा लॉन्च किए गए ये तीन महत्वपूर्ण सर्वे कौन-से हैं?
केंद्रीय बैंक ने अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए ये तीन सर्वे शुरू किए हैं:

  • महंगाई प्रत्याशा सर्वेक्षण (IESH): इसका उद्देश्य व्यक्तिगत उपभोग टोकरी के आधार पर कीमतों के उतार-चढ़ाव और महंगाई के प्रति लोगों के आकलनों को 19 शहरों में दर्ज करना है।
  • शहरी उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (UCCS): इसके तहत शहरी परिवारों से उनकी आर्थिक स्थिति, रोजगार, मूल्य स्तर, आय और खर्चों पर गुणात्मक प्रतिक्रियाएं ली जाएंगी।
  • ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (RCCS): इसके माध्यम से 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोगों की वर्तमान धारणा और भविष्य की उम्मीदों का आकलन किया जाएगा।

इन सर्वेक्षणों का दायरा और भौगोलिक विस्तार कितना बड़ा है?
भारतीय रिजर्व बैंक ने इन सर्वेक्षणों के लिए देश के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को व्यापक रूप से शामिल किया है:

  • शहरी क्षेत्र: महंगाई प्रत्याशा और शहरी उपभोक्ता विश्वास सर्वे देश के 19 प्रमुख शहरों में आयोजित किए जा रहे हैं। इन शहरों में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, अहमदाबाद, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, लखनऊ, नागपुर, पटना, रायपुर, रांची और तिरुवनंतपुरम शामिल हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में आयोजित किया जा रहा है, जिससे परिवारों की क्रय शक्ति का सटीक आकलन हो सके। 

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों के लिए इन सर्वेक्षणों के क्या मायने हैं?

विज्ञापन

7 अक्तूबर को घोषित होने वाली आगामी मौद्रिक नीति में इन सर्वेक्षणों के परिणाम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आरबीआई के अनुसार, इन अध्ययनों के निष्कर्ष मौद्रिक नीति तैयार करने में उपयोगी इनपुट साबित होते हैं। नीतिगत ब्याज दरें तय करते समय एमपीसी केवल व्यापक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि आम जनता की महंगाई को लेकर धारणा और उनके खर्च करने के व्यवहार को भी ध्यान में रखती है।

अलग-अलग क्षेत्रों और उद्योगों पर इन सर्वे के परिणामों का क्या असर होगा?
आरबीआई के इन सर्वेक्षणों के नतीजे कॉर्पोरेट, एमएसएमई और वित्तीय बाजारों को प्रभावित करते हैं:

  • रिटेल सेक्टर: यदि सर्वे में परिवारों की आय और खर्च करने की इच्छा सकारात्मक रहती है, तो रिटेल और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में मांग बढ़ने की उम्मीद मजबूत होगी। 
  • ग्रामीण बाजार: ग्रामीण सर्वे के आंकड़ों से कंपनियों को अर्ध-शहरी और ग्रामीण बाजारों के लिए बिक्री रणनीति बनाने में मदद मिलती है। 

 नीतिगत फैसलों से पहले जनता की आवाज सुनना क्यों जरूरी है?
संक्षेप में, रिजर्व बैंक के ये तीनों सर्वे देश की आर्थिक सेहत का वास्तविक थर्मामीटर हैं। 19 शहरों और 31 राज्यों के ग्रामीण अंचलों से मिलने वाली प्रतिक्रियाएं यह तय करेंगी कि आने वाले दिनों में देश का उपभोक्ता कितना आश्वस्त महसूस कर रहा है। 7 अक्टूबर को होने वाली मौद्रिक नीति की घोषणा में इन सर्वेक्षणों का असर साफ तौर पर दिखाई देगा, जो यह तय करेगा कि देश में ब्याज दरें किस दिशा में जाएंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें