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FCRA: एनजीओ पर सरकार ने कसा शिकंजा; विदेशी चंदे के नियमों में बड़े बदलाव किए गए, जुर्माने में भारी इजाफा

Tue, 23 Jun 2026 06:39 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के तहत गैर-सरकारी संगठनों के लिए जुर्माने और नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब विदेशी चंदे के दुरुपयोग पर भारी जुर्माना लगेगा, साथ ही पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
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एफसीआरए के तहत जुर्माना। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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गृह मंत्रालय ने गैर-सरकारी संगठनों की ओर से विदेशी अंशदान प्राप्त करने और उपयोग करने से जुड़े विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत कई अपराधों के लिए जुर्माने में संशोधन किया है। सरकार ने सोमवार को एक गजट अधिसूचना के माध्यम से इन आदेशों को अधिसूचित किया। इन संशोधनों का उद्देश्य भारत में एनजीओ द्वारा विदेशी धन के उपयोग में जवाबदेही बढ़ाना है। नियमों को सख्त करके पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

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प्रशासनिक खर्चों के लिए प्राप्त अंशदान के 20 फीसदी से अधिक विदेशी अंशदान का उपयोग करने पर एक लाख रुपये या सीमा से अधिक खर्च की गई राशि का 5 फीसदी, जो भी अधिक हो, का जुर्माना लगेगा। सट्टेबाजी गतिविधियों में विदेशी अंशदान का उपयोग करने पर एक लाख रुपये या निवेश की गई राशि का 30 फीसदी, जो भी अधिक हो, का जुर्माना लगेगा। इसके अतिरिक्त, अर्जित लाभ का 100 फीसदी वसूल किया जाएगा। यदि विदेशी अंशदान का उपयोग प्राप्त उद्देश्य के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया गया, तो एक लाख रुपये या उपयोग की गई राशि का 30 फीसदी, जो भी अधिक हो, का जुर्माना लगाया जाएगा।

अधिनियम के उल्लंघन में विदेशी अंशदान स्वीकार करने या उपयोग करने पर भी समान जुर्माना लगेगा। इसमें ऐसे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में धन का उपयोग करना भी शामिल है जिसके लिए पंजीकरण नहीं मिला है। सरकार ने एफसीआरए नियम, 2011 में कई संशोधन अधिसूचित किए हैं। ये संशोधन भारत में एनजीओ द्वारा विदेशी धन प्राप्त करने और उपयोग करने के तरीके में जवाबदेही को सख्त करते हैं।

क्या विदेशी नागरिकों की भूमिका सीमित होगी?

सरकार ने विदेशी धन प्राप्त करने के नियमों में भी संशोधन किया है। अब एनजीओ को उद्देश्यों और संचालन क्षेत्रों की पूर्वनिर्धारित सूची से चुनना होगा। भारतीय मूल के अलावा विदेशी नागरिकों वाले किसी भी संघ को आमतौर पर विदेशी धन प्राप्त करने के लिए पंजीकरण या पूर्व अनुमति नहीं मिलेगी। हालांकि, सरकार विशेष मामलों में विदेशी नागरिकों को प्रमुख पदाधिकारी बनने की अनुमति दे सकती है। "प्रमुख पदाधिकारी" की परिभाषा का विस्तार किया गया है। इसमें कंपनी निदेशक, फर्मों के भागीदार, न्यासी और हिंदू अविभाजित परिवार के कर्ता शामिल हैं।

पंजीकरण के लिए क्या नए नियम हैं?

पंजीकरण के लिए आवेदन करते समय एनजीओ को अपने सटीक उद्देश्य और संचालन के राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बताने होंगे। इन उद्देश्यों को नियमों में दी गई सूची से ही चुनना होगा। धार्मिक शिक्षा, आस्था परंपराओं का दस्तावेजीकरण और स्वदेशी विश्वासों के संरक्षण जैसे उद्देश्यों को "धर्म-परिवर्तन को छोड़कर" पूरा किया जाना चाहिए। एनजीओ को अपने सामाजिक मीडिया खातों का विवरण भी देना होगा। 2026 से पहले पंजीकृत सभी संघों को एक वर्ष के भीतर अपने विशिष्ट उद्देश्य सरकार को बताने होंगे। प्रत्येक अतिरिक्त राज्य या उद्देश्य जोड़ने पर 300 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगेगा।

निष्क्रिय एनजीओ पर क्या कार्रवाई होगी?

निष्क्रिय एनजीओ को लाइसेंस रखने से रोकने के लिए सरकार ने न्यूनतम खर्च सीमा तय की है। अब एनजीओ को पिछले दो वित्तीय वर्षों में अपनी चुनी हुई गतिविधियों पर कम से कम 10 लाख रुपये का विदेशी अंशदान खर्च करना होगा। पंजीकरण के नवीनीकरण या रद्द होने से बचने के लिए यह आवश्यक है। पूर्व अनुमति के तहत विशिष्ट उद्देश्य के लिए विदेशी धन प्राप्त करने वाले एनजीओ को अगली किस्त तभी मिलेगी जब पिछली किस्त का कम से कम 75 फीसदी उपयोग हो चुका हो। सरकार उपयोग की पुष्टि के लिए क्षेत्र जांच भी करेगी। मध्यस्थ प्रेषण वाहनों या दाता-सलाह वाले निधियों के माध्यम से धन आने पर एनजीओ को अंतिम दाताओं का खुलासा करना होगा।

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