इंटरनेट पर किसी वेबसाइट को सुरक्षित बनाने में डिजिटल सर्टिफिकेट की अहम भूमिका होती है। लेकिन हाल ही में भारतीय साइबर सुरक्षा कंपनी ई-मुद्रा के कुछ डिजिटल सर्टिफिकेट में ऐसी खामी सामने आई, जिसने इंटरनेट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। इस मामले के सामने आने के बाद कई बड़ी टेक कंपनियों ने प्रभावित सर्टिफिकेट को ब्लॉक करने के कदम उठाए।
ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है ई-मुद्रा? यह कंपनी क्या सेवाएं देती है? इससे जुड़ा क्या मामला सामने आया? अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने क्या कदम उठाए? ई-मुद्रा ने क्या सफाई दी है? सरकार ने क्या कदम उठाया है?
ई-मुद्रा की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी। यह डिजिटल पहचान और सुरक्षा से जुड़ी कंपनी है। कंपनी डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट और ई-साइन जैसी सेवाएं देती है। इनकी मदद से किसी व्यक्ति या संस्था की डिजिटल पहचान की पुष्टि की जाती है और ऑनलाइन लेनदेन को सुरक्षित बनाने में मदद मिलती है।
ई-मुद्रा के सह-संस्थापक कौशिक श्रीनिवासन ने कहा कि कंपनी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगी। इसके लिए जांच और निगरानी के नियम सख्त किए जाएंगे। साथ ही, सुरक्षा जांच में इंसानों की मदद के लिए एआई और ऑटोमेटेड टूल्स का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका का एक ग्राहक कंपनी के ईसीसी सिस्टम से जारी करीब 30 हजार डिजिटल सर्टिफिकेट इस्तेमाल कर रहा है। वहीं, ब्राउजर अभी भी कंपनी के जी1 यानी आरएसए सिस्टम से जारी सर्टिफिकेट पर भरोसा कर रहे हैं। कंपनी के ज्यादातर सर्टिफिकेट इसी सिस्टम से जारी होते हैं। भारत में कुछ ग्राहक सीधे तौर पर प्रभावित नहीं हुए हैं, लेकिन इस मामले के कारण उनके मन में कंपनी की सुरक्षा को लेकर संदेह पैदा हो सकता है। इसलिए कंपनी इन ग्राहकों को दूसरे सेवा प्रदाताओं की ओर ले जाने की कोशिश कर रही है।
कौशिक श्रीनिवासन ने कहा कि लंबे समय से कंपनी के साथ जुड़े ग्राहकों ने उसका समर्थन किया है। कंपनी दोबारा लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया कि नीति आयोग ने इस मामले पर कंपनी से कई सवाल पूछे थे, जिनके जवाब दिए जा रहे हैं। नीति आयोग ने भी कहा है कि इस मामले का भारत में डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) और ई-साइन कारोबार पर असर नहीं पड़ा है।