रेल यात्रियों की लाइफलाइन कही जाने वाली इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में राजस्व तो 18 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है, लेकिन शुद्ध लाभ लगभग स्थिर रहा।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 330.16 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभदर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के 330.71 करोड़ रुपये से कम है। परिचालन से कंपनी का राजस्व 1,369.53 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के 1,159.7 करोड़ रुपये से सालाना आधार पर 18.1 फीसदी अधिक है।
| सेगमेंट | वित्त वर्ष 2026-27 पही तिमाही राजस्व | सालाना बढ़त | मुनाफा मार्जिन का दायरा |
| कैटरिंग | 732.26 करोड़ | +33.9% | 10 से 12% (कम मार्जिन) |
| इंटरनेट टिकटिंग | 361.00 करोड़ | +0.6% | 80 से 85% (सबसे अधिक मार्जिन) |
| पर्यटन | 168.07 करोड़ | +13.8% | 14 से 15% |
| रेल नीर | 113.91 करोड़ | सपाट (-0.8%) | 10 से 14% |
राहुल हिमालियन ने बताया कि, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मुनाफा घटने के पीछे कई बड़े कारण रहे। सबसे पहला कारण है, ग्रेच्युटी की सीमा 20 से 25 लाख रुपये होने और पोस्ट-रिटायरमेंट सेटलमेंट के लिए 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च बुक करना पड़ा। दूसरा कारण है, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (पीओसी) ट्रेनें अंतिम तिमाही में नहीं चल पाईं, जिससे 4.7 करोड़ रुपये का सीधा असर पड़ा। तीसरा कारण है, पश्चिम एशिया संकट के चलते रेल नीर की बोतलों के कैप में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोलियम आधारित रेजिन की कीमतें 30 फीसदी तक बढ़ना। कच्चे माल की लागत 55 करोड़ से बढ़कर सीधे 61 करोड़ रुपये हो गई, जिसने अकेले रेल नीर के मुनाफे में 4 करोड़ रुपये की चपत लगाई। चौथा कारण है, कंपनी की कुल आय में कैटरिंग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही, लेकिन इसमें मुनाफा मार्जिन केवल 10-12 फीसदी ही है।
राहुल हिमालियन ने बताया कि सप्लाई गैप को पाटने और नॉन-फेयर व नीर से कमाई बढ़ाने के लिए कंपनी ने आक्रामक रणनीति बनाई है। इसके तहत मैसूर, भागलपुर, रांची और प्रयागराज में नए रेल नीर प्लांट लगाए जा रहे हैं। प्रयागराज और मैसूर में जमीन मिल चुकी है, रांची में जमीन आवंटन की पुष्टि हो गई है। इसके अलावा 250 किलोमीटर के दायरे को कवर करने के लिए वाराणसी और पुणे में भी नए प्लांट की संभावना तलाशी जा रही है।