देश के सबसे बड़े प्राथमिक शेयर निर्गम जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ (Jio IPO) के अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब निवेशकों की नजरें इसके स्टॉक एक्सचेंज डेब्यू पर टिक गई हैं। 21 अक्तूबर से 23 अक्तूबर 2026 के दौरान बोली के लिए खुला 30,187.65 करोड़ रुपये का यह आईपीओ कुल 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ का अलॉटमेंट स्टेटस चेक करने के तीन आधिकारिक और पूरी तरह सुरक्षित तरीके हैं। आप इस आईपीओ के आधिकारिक रजिस्ट्रार केफिन टेक्नोलॉजिस की वेबसाइट पर जाकर सीधे स्टेटस देख सकते हैं।
शेड्यूल के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ के शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्तूबर 2026 (सोमवार) से शुरू किया गया।
आमतौर पर रजिस्ट्रार के पास डेटा प्रोसेसिंग में थोड़ा समय लगता है, इसलिए अलॉटमेंट का फाइनल रिजल्ट 26-27 अक्तूबर की देर शाम या आधी रात तक आधिकारिक तौर पर ऑनलाइन लाइव हो जाएगा।
जियो आईपीओ का अलॉटमेंट स्टेटस जांचने के लिए आप सीधे इन ऑफिशियल लिंक्स पर जा सकते हैं:
जैसे ही आप ऊपर दिए गए डायरेक्ट लिंक पर जाकर अपना पैन नंबर डालेंगे, स्क्रीन पर आपको अलॉटमेंट की डिटेल दिखेगी। अगर वहां 'Shares Allotted' के आगे '12' (या आपके द्वारा एप्लाई किए गए लॉट के मल्टीपल में) लिखा आता है, तो इसका मतलब है कि आपको शेयर मिल चुके हैं। इसके अलावा, सफल अलॉटमेंट होने पर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल पर एनएसडीएल/सीडीएसएल और आपके ब्रोकर की तरफ से कन्फर्मेशन मैसेज भी आ जाएगा।
चूंकि KFin Technologies इस आईपीओ की आधिकारिक रजिस्ट्रार है, इसलिए सबसे पहले रिजल्ट यहीं अपडेट होता है।
जिओ प्लेटफॉर्म्स का यह पब्लिक इश्यू भारतीय प्राथमिक बाजार का सबसे बड़ा आईपीओ रहा है, जिसके तहत 27 करोड़ नए शेयर जारी कर 30,187.65 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न निवेशक श्रेणियों में इस इश्यू को 22.19 गुना ओवरऑल सब्सक्रिप्शन मिला।
ईटी ने सेबी-रजिस्टर्ड फंडामेंटल एनालिस्ट अम्बरीश बालिगा के हवाले से बताया, इस आईपीओ में संस्थागत निवेशकों की मांग उम्मीद से कहीं अधिक रही। हालांकि, अब मुख्य सवाल यह है कि क्या यह मांग सेकेंडरी मार्केट में भी बनी रहेगी।
बालिगा ने बताया कि जहां ग्रे मार्केट में 20 से 22 प्रतिशत प्रीमियम के संकेत मिल रहे थे, वहीं वे इश्यू के विशाल आकार को देखते हुए 8 से 10 प्रतिशत के सीमित लिस्टिंग प्रीमियम की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि 10 प्रतिशत प्रीमियम पर भी बाजार में मुनाफावसूली के कारण बिकवाली का दबाव आ सकता है, क्योंकि कई निवेशकों ने केवल लिस्टिंग गेन हासिल करने के उद्देश्य से आवेदन किया था।
जिन निवेशकों को अलॉटमेंट नहीं मिला है, उन्हें शुरुआती उछाल के दौरान शेयर के पीछे भागने से बचना चाहिए। अम्बरीश बालिगा का सुझाव है कि यदि शेयर लिस्टिंग के बाद अपने शुरुआती लाभ को बरकरार रखने में विफल रहता है, तो निवेशकों को आईपीओ प्राइस (₹1,119) के करीब एंट्री की तलाश करनी चाहिए।
ईटी के अनुसार, अविनाश मेंटर रिसर्च सर्विसेज के संस्थापक एवं रिसर्च हेड अविनाश गोरक्षकर ने अलॉटमेंट से चूके निवेशकों को शुरुआती कारोबारी सत्रों में जल्दबाजी में खरीदारी न करने की सलाह दी है। गोरक्षकर का मानना है कि लिस्टिंग के तुरंत बाद शेयर तेजी से ऊपर की ओर कदम बढ़ा सकता है, लेकिन उसके बाद उसमें मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निवेशकों को पहले शेयर की कीमत को स्थिर होने देना चाहिए और उसके बाद ही बाजार के रुख को देखकर सेकेंडरी मार्केट में प्रवेश करना चाहिए।
जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों में लिस्टिंग के दिन एंट्री लेने का फैसला पूरी तरह से शेयर के ओपनिंग प्राइस और शुरुआती सत्रों के ट्रेडिंग पैटर्न पर निर्भर करेगा। बाजार विशेषज्ञों की राय स्पष्ट है कि निवेशकों को ऊंचे भाव पर फोमो का शिकार होने के बजाय लिस्टिंग प्राइस के स्थिर होने या फिर आईपीओ प्राइस के समीप करेक्शन आने का धैर्यपूर्वक इंतजार करना चाहिए।