आखिर क्यों इतना महंगा बिक रहा ये हैंडबैग? (सांकेतिक तस्वीर)
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Zara Hatke: दुनिया में एक से एक बड़े ब्रांड के बैग मिलते हैं। इन बैग की कीमत लाखों में होती है। इन दिनों एक बैग पुरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। इस बैग की कीमत जानकर आपके होश उड़ हो जाएंगे। सबसे खास बात यह है कि इस बैग को दुनिया के सबसे खतरनाक डायनासोर के चमड़े से बनाया गया है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी रोचक बातें।
वैज्ञानिकों ने इस हैंडबैग को बनाने के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक डायनासोर टी-रेक्स के जीवाश्म से निकाले गए कोलेजन प्रोटीन का इस्तेमाल किया है। वैज्ञानिकों ने हाल ही में एम्स्टर्डम के आर्ट जू म्यूजियम में अनोखा हैंडबैग पश किया। बैग का रंग हल्का नीला और हरा है, जिसे पिंजरे में एक चट्टान पर रखा गया है। इसके ऊपर टी-रेक्स की नकल खड़ा है।
हैंडबैग की 11 मई तक प्रदर्शनी चलेगी। इसके बाद नीलामी में इसे बेच दिया जाएगा। 4.63 करोड़ रुपये से ज्यादा इसकी शुरुआती कीमत है। इस प्रोजक्ट का मकसद लैब में बनाए गए चमड़े का इस्तेमाल दिखाने के लिए है। वैज्ञानिकों ने टी-रेक्स के जीवाश्मों से बेहद पुराने प्रोटीन के छोटे-छोटे टुकड़े निकाले थे। फिर उन्होंने इन टुकड़ों को जेनेटिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर एक अज्ञात जानवर की कोशिका में डाला। इससे कोलेजन प्रोटीन तैयार हो गया, जिसे बाद में चमड़े में बदला गया।
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इस प्रोजेक्ट को तीन कंपनियों ने मिलकर तैयार किया है। इनमें ऑर्गेनॉइड, वीएमएल और लैब-ग्रोन लेदर लिमिटेड शामिल हैं। द ऑर्गेनॉइड कंपनी के सीईओ थॉमस मिशेल ने कहा कि इस प्रोजक्ट में कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
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लैब-ग्रोन लेदर लिमिटेड के सीईओ चे कॉनन का कहना है कि यह पर्यावरण के अनुकूल चमड़ा के साथ ही तकनीकी एडवांस भी है। इन तीनों कंपनियों ने 2023 में वूली मैमथ के डीएनए को भेड़ की कोशिकाओं में डाया और बड़ा मीटबॉल बनाया था।
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कुछ वैज्ञानिकों ने उठाए सवाल
कुछ वैज्ञानिकों ने टी-रेक्स लेदर के आशंका जाहिर की है। नीदरलैंड की वेर्टीब्रेट पैलियोन्टोलॉजिस्ट मेलानी ड्यूरिंग का कहना है कि डायनासोर की हड्डियों में कोलेजन सिर्फ छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में रह जाता है, जिनसे टी-रेक्स की असली त्वचा या चमड़ा नहीं बनाया जा सकता।