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बिहार: नगरपालिका अधिनियम में बड़े बदलाव, मेयर को ज्यादा अधिकार; नक्शा और लाइसेंस की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

Tue, 03 Nov 2026 11:10 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगंज

सार

बिहार सरकार ने बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 में संशोधन करते हुए नगर निकायों की प्रशासनिक व्यवस्था में कई बदलाव किए हैं। नए अध्यादेश के तहत मेयर को सशक्त स्थायी समिति की अध्यक्षता और आपात स्थिति में बिना पूर्व अनुमति जरूरी काम कराने का अधिकार दिया गया है।
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सीएम सम्राट चौधरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार सरकार ने राज्य के नगर निकायों की कार्यप्रणाली में बदलाव करते हुए बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 में संशोधन किया है। नए अध्यादेश के जरिए नगरपालिकाओं के प्रशासनिक अधिकारों, विज्ञापन व्यवस्था, व्यावसायिक गतिविधियों और भवन निर्माण की स्वीकृति से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य नगर निकायों के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना और लाइसेंस सहित विभिन्न स्वीकृतियों की प्रक्रिया को ऑनलाइन करना है। संशोधन के बाद नगरपालिका में मेयर की भूमिका पहले से अधिक प्रभावी होगी। नगरपालिका की कार्यपालक शक्तियां सशक्त स्थायी समिति में निहित रहेंगी और मेयर इस समिति के अध्यक्ष होंगे।

मेयर की अध्यक्षता में होगी सशक्त स्थायी समिति, महीने में दो बैठकें जरूरी

नए अध्यादेश के अनुसार, मेयर सशक्त स्थायी समिति के अध्यक्ष होंगे। नगरपालिका की सभी कार्यपालक शक्तियां इसी समिति में निहित रहेंगी। मेयर को हर महीने समिति की दो बैठकें बुलानी होंगी। सामान्य परिस्थितियों में ये बैठकें महीने के पहले और तीसरे सोमवार को आयोजित की जाएंगी। यदि निर्धारित दिन अवकाश रहता है, तो बैठक के लिए दूसरी तारीख तय की जा सकेगी। अगर मेयर किसी कारण से बैठक बुलाने में असमर्थ रहते हैं, तो उप मेयर समिति की बैठक आमंत्रित कर सकेंगे। इस व्यवस्था के जरिए नगर निकायों के प्रशासनिक कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने का प्रावधान किया गया है।

आपात स्थिति में बिना पूर्व अनुमति काम कराने का अधिकार

अध्यादेश में मेयर को आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष अधिकार भी दिए गए हैं। अब संकट की स्थिति में मेयर नगरपालिका बोर्ड या समिति की पूर्व अनुमति के बिना भी जरूरी काम कराने का निर्देश दे सकेंगे। हालांकि, ऐसे कार्यों की जानकारी 15 दिनों के भीतर संबंधित समिति या बोर्ड को देना अनिवार्य होगा। वहीं, निकायों की प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। मुख्य नगरपालिका पदाधिकारी को नगरपालिका का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया गया है। इसके तहत नगर निकाय के सभी पदाधिकारी और कर्मचारी मुख्य नगरपालिका पदाधिकारी के अधीन काम करेंगे।

भवन का नक्शा पास कराने की प्रक्रिया होगी आसान

भवन निर्माण से जुड़ी स्वीकृतियों को आसान बनाने के लिए नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत भवन निर्माण योजना स्वतः अनुमोदित हो सकेगी या सक्षम प्राधिकारी से इसकी मंजूरी ली जा सकेगी। इससे भवनों के नक्शे की स्वीकृति की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

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अध्यादेश के मुताबिक, सूचीबद्ध वास्तुविदों को सरकार के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही काम करना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि भवन योजना से संबंधित सभी जरूरी तकनीकी मंजूरी और अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिए गए हैं।

दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस ऑनलाइन

व्यावसायिक गतिविधियों को आसान बनाने के लिए दुकानों और अन्य गैर-आवासीय प्रतिष्ठानों के लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जाएगी। इससे कारोबारी डिजिटल माध्यम से लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे और उन्हें स्वीकृति प्राप्त करने में सहूलियत होगी। नए प्रावधानों के तहत निर्धारित समय सीमा में लाइसेंस शुल्क जमा नहीं करने पर हर महीने अधिकतम एक प्रतिशत तक दंड लगाया जा सकेगा। हालांकि, कुल दंड की राशि किसी भी स्थिति में वार्षिक लाइसेंस शुल्क से अधिक नहीं होगी।

विज्ञापन टैक्स की जगह लगेगा विज्ञापन शुल्क

अध्यादेश में विज्ञापन से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद विज्ञापन पर कर लगाने के अधिकारों में हुए बदलाव के मद्देनजर अब विज्ञापन टैक्स की जगह विज्ञापन शुल्क लिया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों, दीवारों, होर्डिंग और बैनर पर विज्ञापन लगाने के लिए लाइसेंस, नियमन और निगरानी की व्यवस्था होगी। इसके अलावा विज्ञापन से जुड़े ढांचों में सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था और रखरखाव के निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। इन मानकों का उल्लंघन करने वाली संस्था या व्यक्ति पर अधिकतम पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

बिना शुल्क विज्ञापन लगाने पर दो से पांच गुना तक जुर्माना

नए नियमों में बिना निर्धारित शुल्क दिए विज्ञापन लगाने पर अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सामान्य मामलों में बिना शुल्क विज्ञापन लगाने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था से दोगुना जुर्माना वसूला जाएगा। यदि नोटिस दिए जाने के बाद भी उल्लंघन जारी रहता है या 12 महीने के भीतर दोबारा ऐसी गलती की जाती है, तो जुर्माना तीन गुना तक होगा। वहीं, विज्ञापन के कारण सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात, जल निकासी, अग्निशमन सेवाओं या आपदा प्रबंधन से जुड़े ढांचे में बाधा उत्पन्न होने पर पांच गुना जुर्माना लगाया जा सकेगा।

इन सभी प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए राज्य सरकार और नगरपालिकाएं आवश्यक नियम एवं विनियम तैयार करेंगी। नए संशोधनों के जरिए नगर निकायों के प्रशासनिक कामकाज, भवन निर्माण की स्वीकृति, व्यावसायिक लाइसेंस और विज्ञापन व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने का प्रावधान किया गया है।

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