भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ उपेंद्र कुशवाहा।
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कई नाम चल रहे थे, लेकिन 'अमर उजाला' लगातार कह रहा था कि उपेंद्र कुशवाहा को बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ ढाल बनकर खड़े होने का फायदा मिलेगा। उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ही केंद्रीय मंत्रियों जीतन राम मांझी और चिराग पासवान से भी अच्छे संबंध रखे थे। अब परिणाम राज्यसभा टिकट के रूप में सामने आ चुका है। इस सीट पर उपेंद्र कुशवाहा को विपक्ष से भी मदद लेनी होगी। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मानव संसाधन राज्य मंत्री रह चुके हैं। मंत्री रहते हुए ही उन्होंने इस्तीफा देकर खुद को एनडीए से अलग किया था। लंबा समय वनवास में गुजरा, लेकिन एक बार फिर अब राष्ट्रीय राजनीति में उनकी एंट्री हो रही है।
एनडीए के अंदर उपेंद्र कुशवाहा के नाम को लेकर सहमति बन गई
बिहार से राज्यसभा की चार सीटों पर एनडीए की जीत तय है। उनमें से दो सीटें भारतीय जनता पार्टी ने रखी है और दो जनता दल यूनाइटेड को दिया गया है। जिस सीट पर मैनेज करना जरूरी है, वह सीट एनडीए में उपेंद्र कुशवाहा के खाते में आई है। एनडीए के अंदर उनके नाम को लेकर सहमति बन गई, जिससे राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने पांच मार्च को उनके नामांकन की जानकारी मीडिया से साझा की। अब उपेंद्र कुशवाहा को जीत सुनिश्चित करने के लिए खुद और एनडीए के बाकी सहयोगी दलों की मदद लेते हुए विपक्ष के भी कुछ विधायकों को मैनेज करना होगा।
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पांच मार्च को कुशवाहा अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा चुनाव के लिए आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। वह आगामी पांच मार्च को नामांकन दाखिल करेंगे। पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) समर्थित उम्मीदवार के रूप में उपेंद्र कुशवाहा मैदान में उतरेंगे। इस संबंध में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के शीर्ष नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श और आपसी संवाद के बाद निर्णय लिया गया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता नितिन भारती ने जानकारी देते हुए कहा कि 5 मार्च को कुशवाहा बिहार विधानसभा में अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इस अवसर पर एनडीए के सभी घटक दलों के नेताओं की उपस्थिति रहेगी।