जीतन राम मांझी विवादित बयान के बाद सुर्खियों में।
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हिन्दुतानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भारत निर्वाचन आयोग को मुसीबत में डाल दिया है। बिहार चुनाव के पहले विपक्ष भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ लड़ता रह गया था, लेकिन उतनी ताकत नहीं थी। लेकिन, जीतन राम मांझी ने विपक्ष के आरोपों को ताकत दे दी है। बिहार की राजनीति में मांझी के एक बयान से भूचाल मचा है। 'अमर उजाला' ने गुरुवार को इसकी खबर भी प्रकाशित की थी और वीडियो भी लगाया था कि कैसे जीतन राम मांझी बता रहे हैं कि उन्होंने 2020 के चुनाव में एक सीट पर 2700 वोट मैनेज कर दिए थे। हारते हुए को जिताने में मदद करने वाले जिलाधिकारी (तत्कालीन जिला निर्वाचन पदाधिकारी) का भी नाम मांझी ने बता दिया। चुनाव के समय जिलाधिकारी भारत निर्वाचन आयोग के तहत जिला निर्वाचन पदाधिकारी हो जाते हैं, इसलिए जवाब देना और जांच कराना अब आयोग की मजबूरी हो गई है।
विपक्ष क्या लगाता रहा है आरोप, मांझी ने कैसे दी ताकत?
देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के खिलाफ रहे दल लगातार सत्ता पर चुनाव आयोग को नियंत्रित करने का आरोप लगा रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले राज्य में विपक्षी दलों ने मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण को वोट चोरी करार दिया और चुनाव आयोग के खिलाफ ही जोर-शोर से जुटे रहे। चुनाव में करारी हार के बाद भी वोट चोरी का मुद्दा खत्म नहीं हुआ। आरोप लगाया जाता रहा कि वोटरों को मतदान से रोका गया, हालांकि ऐसी व्यापक खबर कहीं से नहीं आई। लेकिन, अब मांझी ने भरी सभा में यह कह दिया कि एक प्रत्याशी 2020 के चुनाव में 2600-2700 वोटों से हार रहे थे तो उन्होंने तत्कालीन कलेक्टर को देखने कहा और हारते हुए प्रत्याशी की जीत हो गई। इस ताजा प्रकरण का वीडियो भी सामने है। विपक्षी दलों के नेताओं के साथ उस खेमे के लोग भी इस वीडियो को शेयर करते हुए कह रहे हैं कि इस तरह भी वोट चोरी की जा रही है।
निर्वाचन आयोग के पास क्या है विकल्प, क्या कर सकते हैं पूछताछ?
केंद्रीय मंत्री का बयान वीडियो स्वरूप में है। इस वीडियो की पुष्टि 'अमर उजाला' अपने स्तर से नहीं करता है, लेकिन स्थानीय लोग बता रहे हैं कि वीडियो सही है। ऐसे में निर्वाचन आयोग को इसपर अपना पक्ष रखने की नौबत आ सकती है। चाणक्य स्कूल ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं कि "केंद्रीय मंत्री मांझी का बयान अगर सही है तो निर्वाचन आयोग को उनसे संपर्क कर समझना चाहिए कि उन्होंने किस संदर्भ में यह बात कही और वोटों का मैनेजमेंट कैसे संभव हुआ? चूंकि मामला पिछले चुनाव में मैनेज करने का है, इसलिए तत्कालीन डीएम से भी पूछताछ होनी चाहिए। लोकतंत्र की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इतना तो किया ही जाना चाहिए।"
बचने का उपाय है मांझी के पास, जानिए कैसे?
जीतन राम मांझी को जितना बयान वायरल है, उसमें वह किसी विधायक या हारे विधायक का नाम नहीं ले रहे हैं। वह टेकारी के पूर्व विधायक अनिल कुमार के बारे में कह रहे थे, यह बात कही जा रही है। लेकिन, वीडियो में वह 1600 वोटों से हारने की बात कह रहे हैं, जबकि टेकारी से अनिल कुमार 2058 मतों से हारे हैं। इसलिए, इस आधार पर मांझी यह कह सकते हैं कि उन्होंने बात बनाई थी न कि कोई तथ्यात्मक जानकारी दी थी। जहां तक पिछले चुनाव का सवाल है तो अनिल कुमार 2630 मतों से जीते थे। मतलब, बिहार चुनाव 2020 को मैनेज करने के सवाल पर जहां मांझी फंस सकते हैं, वहीं मौजूदा चुनाव का आंकड़ा सही नहीं होने का आधार देकर वह अपनी बातों से पलट भी सकते हैं।