एनआईए ने एसटीएफ के सहयोग से AK-47 बरामदगी मामले में एक और गिरफ्तारी की है। यह गिरफ्तारी ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र से की गई है। गिरफ्तार आरोपी भैरव त्रिपाठी के खिलाफ आर्म्स एक्ट सहित आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं और इस मामले में वह दो वर्षों से फरार चल रहा था।
दरअसल, मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर AK-47 के साथ पकड़े गए आरोपियों के तार खंगालते हुए एनआईए ने ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के निवासी भैरव त्रिपाठी को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद एनआईए और अन्य केंद्रीय एजेंसियां उससे गहन पूछताछ कर रही हैं। इस मामले में एनआईए अब भैरव से हथियारों की खरीद-बिक्री, फंडिंग के अलावा उसके गिरोह और नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है। आरोपी साहेबगंज थाना क्षेत्र के अहियापुर गांव का रहने वाला है।
गौरतलब है कि 5 जुलाई 2024 को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मुजफ्फरपुर जंक्शन से विकास कुमार और सत्यम कुमार को AK-47 के लेंस और बट के साथ गिरफ्तार किया था। इस दौरान पूछताछ में दोनों ने बताया था कि वे दीमापुर से हथियारों की खेप लाकर बिहार में बेचते हैं। इसमें पता चला था कि दीमापुर में पूर्वी चंपारण के मधुबन निवासी मोहम्मद अहमद अंसारी उन्हें AK-47 और अन्य विदेशी हथियार सप्लाई करता था।
पुलिस ने एक AK-47 और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए
जांच में पता चला था कि विकास ने हाल ही में फकुली थाना क्षेत्र के मनकौली निवासी मुखिया के पुत्र देवमनी कुमार को एक AK-47 बेची थी। इसके बाद पुलिस ने मुखिया के घर छापेमारी की। जांच में पता चला कि खरीदी गई AK-47 को मनकौली श्मशान घाट में छिपाकर रखा गया है। इसके बाद पुलिस ने एक AK-47 और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अगस्त 2024 में पुलिस ने केस एनआईए को सौंप दिया था। एनआईए तब से इस हथियार तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच कर रही है। इस मामले में एनआईए अब तक छह लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें मिठनपुरा के तीनकोठिया मोहल्ले के मंजूर खान, मनकौली के देवमनी कुमार, जैतपुर के पोखरैरा निवासी विकास कुमार, वैशाली जिले के हाजीपुर अनजान पीर निवासी सत्यम कुमार और मधुबन के अहमद अंसारी शामिल हैं।
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विभिन्न जिलों में सप्लाई करने में मदद करता था आरोपी
इस मामले में एनआईए ने खुफिया इनपुट के आधार पर ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले से भैरव त्रिपाठी को स्थानीय पुलिस और एसटीएफ के सहयोग से दबोचा। जांच के दौरान सामने आया कि भैरव त्रिपाठी, विकास और मंजूर खान के साथ मिलकर हथियारों की तस्करी कर रहा था। इस दौरान वह दीमापुर से आने वाले हथियारों को बिहार के विभिन्न जिलों में सप्लाई करने में मदद करता था।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि भैरव त्रिपाठी के खिलाफ हत्या, आर्म्स एक्ट और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में अलग-अलग थानों में आठ केस दर्ज हैं। वह पुलिस को लंबे समय से वांछित था।