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बिहार न्यूज: ऑपरेशन सिंदूर में देश के लिए डटा था बेगूसराय का लाल, कश्मीर में बीएसएफ जवान मनीष सिंह की मौत

Thu, 03 Sep 2026 09:31 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय

सार

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद बीएसएफ जवान मनीष कुमार सिंह का बुधवार को इलाज के दौरान निधन हो गया। वह करीब दो दिन से वेंटिलेटर पर थे। मनीष बेगूसराय के रतनपुर के रहने वाले थे।
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बीएसएफ जवान मनीष कुमार सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश की सीमा की सुरक्षा में तैनात बेगूसराय के लाल और बीएसएफ जवान मनीष कुमार सिंह का निधन हो गया। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में ड्यूटी के दौरान करीब चार दिन पहले अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर करीब दो दिन तक उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन बुधवार को इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

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मनीष की मौत की खबर जैसे ही बेगूसराय के रतनपुर स्थित उनके घर पहुंची, परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। अब रतनपुर उस पल का इंतजार कर रहा है, जब देश की सेवा में तैनात उसका लाल तिरंगे में लिपटकर अपने घर लौटेगा।

ऑपरेशन सिंदूर में ड्यूटी निभाने का परिजनों का दावा

परिजनों के अनुसार, मनीष कुमार सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी देश की सेवा में अपनी ड्यूटी निभाई थी। परिवार का दावा है कि उन्होंने देश की सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील अभियानों में जिम्मेदारी निभाई और बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी ड्यूटी को हमेशा प्राथमिकता दी। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर में मनीष की विशिष्ट भूमिका की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में उनकी भूमिका से जुड़ी जानकारी फिलहाल परिजनों के दावे के रूप में ही सामने आई है।

चार दिन पहले अचानक बिगड़ी तबीयत

परिवार के मुताबिक, कुपवाड़ा में ड्यूटी के दौरान करीब चार दिन पहले अचानक मनीष की तबीयत खराब हो गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। इसके बावजूद उनकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। करीब दो दिन पहले उनकी स्थिति और बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा। परिवार और उनके साथी जवानों को उम्मीद थी कि मनीष जिंदगी की जंग जीतकर जल्द ठीक हो जाएंगे। लेकिन बुधवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई और परिवार की सारी उम्मीदें टूट गईं।

शरीर पर गोली के पुराने निशान होने की बात

परिजनों ने बताया कि मनीष के शरीर पर गोली लगने के पुराने निशान भी थे। परिवार के अनुसार, सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में ड्यूटी के दौरान उन्होंने कई बार जोखिम उठाया था। देश की सुरक्षा के लिए लगातार कठिन परिस्थितियों में तैनाती के बावजूद मनीष का हौसला कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने अपनी ड्यूटी को हमेशा सबसे ऊपर रखा।

छुट्टी में घर आते तो पूरे गांव से मिलते थे

रतनपुर के लोगों के बीच मनीष की पहचान एक खुशमिजाज, मिलनसार और सरल स्वभाव के जवान के रूप में थी। जब भी वह छुट्टी पर घर आते थे, गांव के लोगों से आत्मीयता से मिलते और उनका हालचाल लेते थे। इसी वजह से उनकी मौत की खबर से पूरा गांव स्तब्ध है। ग्रामीणों का कहना है कि मनीष सिर्फ अपने परिवार का बेटा नहीं था, बल्कि पूरे गांव का गौरव था।

पार्थिव शरीर लाने कुपवाड़ा रवाना हुए परिजन

मनीष की मौत की सूचना मिलने के बाद उनके भतीजे और साला कुपवाड़ा के लिए रवाना हो गए हैं। वहां जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मनीष के पार्थिव शरीर को बेगूसराय लाया जाएगा। पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने के बाद अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है। गांव के लोग अपने वीर जवान को अंतिम विदाई देने के लिए इंतजार कर रहे हैं।

तिरंगे में लौटेगा रतनपुर का लाल

रतनपुर के लोग अब मनीष के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, जवान को तिरंगे के साथ अंतिम विदाई देने की तैयारी की जा रही है। जिस मनीष ने अपनी जिंदगी के अहम वर्ष देश की सीमाओं की सुरक्षा में लगा दिए, अब वही मनीष तिरंगे में लिपटकर अपने गांव लौटेगा। मनीष की मौत ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं, पूरे रतनपुर को अपने उस लाल पर गर्व है, जिसने देश की वर्दी पहनकर कर्तव्य को हमेशा सर्वोपरि रखा।

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