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Bihar: सावन में हर-हर महादेव से गूंज रहा रामशिला मंदिर, देश के तीसरे स्फटिक शिवलिंग के दर्शन को उमड़ी भीड़

Mon, 10 Aug 2026 06:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया जी

सार

Bihar News: सावन के महीने में गया का रामशिला मंदिर शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। देश के तीसरे स्फटिक शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने भी यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी।
 
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गया जी शहर के रामशीला पहाड़ी पर स्थित स्फटिक शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। ऐसे में गया का रामशिला मंदिर शिवभक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां स्थापित देश के तीसरे स्फटिक शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने भी यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था।

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सावन में बढ़ी आस्था, हर-हर महादेव से गूंज रहा मंदिर
पटना-गया मुख्य मार्ग पर रामशिला पहाड़ के समीप स्थित रामशिला मंदिर इन दिनों हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज रहा है। सुबह से ही श्रद्धालु जल, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प लेकर भगवान शिव का अभिषेक करने पहुंच रहे हैं। पूरे सावन माह में मंदिर परिसर भक्तों की भीड़ से गुलजार रहता है और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है।

तीसरा स्फटिक शिवलिंग बना भक्तों के आकर्षण का केंद्र
रामशिला मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित स्फटिक शिवलिंग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देश का पहला स्फटिक शिवलिंग रामेश्वरम, दूसरा जम्मू के रघुनाथ मंदिर और तीसरा गया के इसी मंदिर में स्थापित है। स्फटिक शिवलिंग को शीतलता, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से यहां पूजा करने पर भगवान शिव मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
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राम-सीता और लक्ष्मण से जुड़ी है मंदिर की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ राजा दशरथ का पिंडदान करने गया आए थे। पिंडदान से पहले उन्होंने रामशिला क्षेत्र में स्थित शिवलिंग की विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया था। यही कारण है कि यह स्थान शिवभक्ति और रामभक्ति, दोनों का अद्भुत संगम माना जाता है।

प्राचीन मंदिर में विराजमान हैं कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं
मंदिर के पुजारी लक्ष्मण बाबा बताते हैं कि यह अत्यंत प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण टिकारी के महाराज गोपाल शरण ने कराया था। मंदिर में शिव परिवार, राम दरबार और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां भगवान गणेश की मूंगा पत्थर से बनी दुर्लभ प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है, जिसे देश की चुनिंदा प्रतिमाओं में गिना जाता है।

रामसरोवर में पिंडदान और तर्पण का भी है महत्व
मंदिर के ठीक सामने स्थित रामसरोवर का भी धार्मिक महत्व है। गया आने वाले अनेक श्रद्धालु यहां पिंडदान और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी करते हैं। इसी कारण यह स्थल केवल शिवभक्तों ही नहीं, बल्कि पितृपक्ष और सनातन परंपराओं से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

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सावन में कई गुना बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़
सावन के प्रत्येक सोमवार और विशेष पर्वों पर रामशिला मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। दूर-दराज से आने वाले भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं। प्राचीन मान्यताओं, ऐतिहासिक विरासत और शिवभक्ति का अद्भुत संगम यह मंदिर सावन में गया की धार्मिक पहचान को और अधिक विशेष बना देता है।

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