फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jharkhand: तीन साल पहले जंगल से गायब हुआ था CRPF जवान; पत्नी बोली- या तो पति को खोजो या शहीद घोषित करो

Tue, 26 May 2026 03:39 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

Jharkhand: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के रहने वाले सीआरपीएफ जवान बादल मुर्मू पिछले तीन वर्षों से लापता हैं। परिवार ने सरकार से सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा है कि या तो जवान को खोजा जाए या उन्हें शहीद घोषित कर परिवार को मुआवजा और अन्य सुविधाएं दी जाएं।
Register For Event
विज्ञापन
जंगल से लापता जवान - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में तीन साल से लापता सीआरपीएफ जवान के परिवार ने अब मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई है। परिवार का कहना है कि सरकार या तो जवान को खोजे या फिर उसे शहीद घोषित करे।

विज्ञापन


माओवादियों द्वारा अपहरण की आशंका
सीआरपीएफ की 197वीं बटालियन में तैनात कांस्टेबल बादल मुर्मू 6 जनवरी 2023 को झारखंड के सारंडा जंगल स्थित किरीबुरु बेस कैंप से रहस्यमय तरीके से लापता हो गए थे। परिवार को आशंका है कि उनका माओवादियों ने अपहरण कर लिया होगा।

तीन साल से न्याय की आस में परिवार
बादल मुर्मू की पत्नी झानो मुर्मू ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से परिवार “सरकारी चुप्पी” से परेशान है। उन्होंने बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, डीजीपी, डीआईजी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विज्ञापन


13 हजार की पेंशन में गुजर-बसर मुश्किल
झानो मुर्मू ने बताया कि परिवार फिलहाल सीआरपीएफ से मिलने वाली 13 हजार रुपये मासिक पेंशन पर निर्भर है, जिससे उनका और उनके छह वर्षीय बेटे का पालन-पोषण मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि बेटे को प्राइवेट रेजिडेंशियल स्कूल में पढ़ा रही हैं और नहीं चाहतीं कि पिता की गैरमौजूदगी का असर उसकी पढ़ाई पर पड़े।

शहीद का दर्जा और मुआवजे की मांग
उन्होंने कहा, 'मेरे पति ड्यूटी के दौरान लापता हुए थे। अगर उन्होंने देश के लिए जान कुर्बान की है तो हमारे परिवार को शहीद जवानों के परिवारों की तरह मुआवजा, अन्य सुविधाएं और अनुकंपा नियुक्ति मिलनी चाहिए।'

आखिरी कॉल में कहा था- मकर संक्रांति पर लौटूंगा
परिवार के मुताबिक, बादल मुर्मू ने 5 जनवरी 2023 को पत्नी से आखिरी बार बात की थी। उन्होंने बताया था कि वे जंगल में एक ऑपरेशन पर जा रहे हैं और मकर संक्रांति पर छुट्टी लेकर घर लौटेंगे।

भाई ने CRPF पर लगाए गंभीर आरोप
बादल मुर्मू के बड़े भाई मंगोविंद मुर्मू, जो स्वयं बीएसएफ जवान हैं, ने आरोप लगाया कि सीआरपीएफ अधिकारियों ने बाद में उन्हें “भगोड़ा” घोषित कर दिया और सिर्फ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर अपने हाथ झाड़ लिए। उन्होंने दावा किया कि सारंडा इलाके के कुछ ग्रामीणों ने परिवार को बताया था कि बादल को पहले माओवादी समूहों के साथ देखा गया था।

बहादुरी के लिए मिल चुका है सम्मान
झानो मुर्मू ने बताया कि उनके पति 2011 से सीआरपीएफ में सेवा दे रहे थे और कई नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल रहे। वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ में पोस्टिंग के दौरान नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में वे घायल हुए थे, जिसके बाद उन्हें बहादुरी के लिए राष्ट्रपति सम्मान भी मिला था।

ये भी पढ़ें:  राज्यसभा चुनाव पर रार, झामुमो ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र; केंद्रीय एजेंसियों पर निगरानी की मांग
विज्ञापन


पुलिस बोली- सभी पहलुओं की जांच जारी
वहीं, पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेणु ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। उन्होंने कहा, “हम गुमशुदगी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। फिलहाल इससे ज्यादा टिप्पणी नहीं कर सकता।”

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें