नॉर्थ कोरिया का अनोखा कार बिजनेस मॉडल
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नॉर्थ कोरिया में इन दिनों ऑटोमोबाइल से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यहां के अमीर परिवारों के युवा अब अपनी गाड़ियों को सिर्फ शान की सवारी नहीं, बल्कि कमाई का एक पक्का जरिया बना रहे हैं। और मजे की बात यह है कि इसके लिए उन्हें खुद ड्राइविंग तक नहीं आती। डेली एनके की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया में 20 से 30 साल के युवा गाड़ियां खरीदकर उन्हें कमर्शियल काम में लगा रहे हैं। आइए समझते हैं कि आखिर ये पूरा बिजनेस मॉडल क्या है और क्या भारत में भी ऐसा किया जा सकता है।
कैसे काम करता है ये 'नो-ड्राइविंग' बिजनेस?
दरअसल, इस नए बिजनेस मॉडल के तहत अमीर परिवारों के युवा (जिनके माता-पिता को वहां 'डोनजू' कहा जाता है) कार, वैन या ट्रक खरीद रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये लोग खुद गाड़ी चलाने के बजाय सैलरी पर अनुभवी ड्राइवर रखते हैं और इन गाड़ियों का इस्तेमाल सवारियां बिठाने या माल ढोने के लिए करते हैं। इसके कुछ बेहद रोचक उदाहरण भी सामने आए हैं। जैसे, ह्येसान शहर की एक 20-25 साल की लड़की ने जिद करके अपने परिवार से एक वैन खरीदी। ड्राइविंग लाइसेंस न होने की वजह से उसने एक ड्राइवर को फिक्स सैलरी पर रख लिया और खुद उस वैन में कंडक्टर बनकर सवारियों से किराया वसूलने लगी। सिर्फ पैसेंजर गाड़ियां ही नहीं, बड़े कमर्शियल ट्रकों में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। हमहंग शहर के एक 30 वर्षीय युवक ने परिवार की मदद से 10-टन का एक भारी-भरकम ट्रक खरीदा। हालांकि, उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस था, लेकिन फिर भी उसने खुद गाड़ी चलाने के बजाय एक ड्राइवर रख लिया ताकि वह ड्राइविंग की थकान से बच सके। अब उसका पूरा फोकस सिर्फ माल की बुकिंग, रूट तय करने और मुनाफे को मैनेज करने पर रहता है।
82 हजार रुपये महीने तक की तगड़ी कमाई
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया में टैक्सी ऑपरेशंस से महीने में करीब 6 हजार चीनी युआन (लगभग 82 हजार भारतीय रुपये) की कमाई हो जाती है। हालांकि किराया कम होता है, लेकिन गाड़ियों में भीड़ और दिन भर में कई चक्कर लगने की वजह से मुनाफा काफी बढ़ जाता है।
गाड़ियों ने बढ़ाई समाज में दूरियां
विशेषज्ञों का मानना है कि नॉर्थ कोरिया के लोग अब गाड़ियों को महज एक लग्जरी के तौर पर देखने के बजाय कमाई की मशीन (इनकम एसेट) समझने लगे हैं। हालांकि, इस ट्रेंड का एक बड़ा नुकसान भी सामने आ रहा है। दरअसल, वहां एक गाड़ी की कीमत 70 हजार से लेकर 1 लाख 50 हजार युआन के बीच होती है, जो किसी भी आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर है। इतनी महंगी गाड़ी खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं है। इसका सीधा नतीजा यह हो रहा है कि समाज में आर्थिक खाई और गहरी होती जा रही है। अमीर लोग इन गाड़ियों के जरिए बिजनेस करके लगातार और अमीर होते जा रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ गरीब लोगों के लिए अपना रोजमर्रा का गुजारा करना भी मुश्किल होता जा रहा है।
क्या आप भारत में ऐसा कर सकते हैं?
अगर सीधे शब्दों में कहें तो जवाब है नहीं। नॉर्थ कोरिया में युवा अपनी निजी गाड़ियों का इस्तेमाल व्यावसायिक तौर पर कर पा रहे हैं, लेकिन भारतीय कानून इसकी बिल्कुल इजाजत नहीं देता। भारत में निजी व्हीकल (सफेद नंबर प्लेट) और कमर्शियल व्हीकल (पीली नंबर प्लेट) के नियम और टैक्स बिल्कुल अलग-अलग हैं। अगर आप भारत में अपनी पर्सनल कार का इस्तेमाल सवारियां ढोने या बिजनेस के लिए करते हैं तो ये पूरी तरह गैर-कानूनी है। इसके अलावा, भारत का सिस्टम रेगुलेशन, लोन की सही व्यवस्था और मजदूरों के अधिकारों पर ज्यादा ध्यान देता है, जो इसे नॉर्थ कोरिया के मनमाने मॉडल से बिल्कुल अलग बनाता है।