जनहित याचिका के बाद कोर्ट में पहुंचा मामला
इस फैसले को भुवनेश्वर निवासी स्निग्धा पात्र ने जनहित याचिका (पीआईएल) के जरिए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में इस निर्देश की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए थे। कोर्ट ने 6 जनवरी को इस मामले में नोटिस जारी किया था। जिसके जवाब में सरकार ने हलफनामा दाखिल किया।
STA की दलील को कोर्ट ने किया खारिज
सुनवाई के दौरान एसटीए की ओर से दलील दी गई कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167(2) के तहत ट्रैफिक चालान लंबित होने पर पीयूसीसी रोका जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
यह भी पढ़ें - Car Parking: पेड़ों के नीचे कार पार्क करने के छुपे हुए खतरे, जो आपको जरूर जानने चाहिए
सरकार ने पहले क्यों जारी किया था आदेश
20 दिसंबर को जारी नोटिफिकेशन में सरकार ने कहा था कि बिना वैध पीयूसीसी के वाहन चलाना एक अपराध है। एसटीए ने यह भी दावा किया था कि बड़ी संख्या में वाहन बिना पीयूसीसी के सड़कों पर चल रहे हैं, जिससे प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब ओडिशा में ईंधन भरवाने के लिए पीयूसीसी अनिवार्य नहीं रहेगा। हालांकि, प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नियम लागू रहेंगे। लेकिन पीयूसीसी न होने के आधार पर ईंधन देने से इनकार नहीं किया जा सकेगा।
यह भी पढ़ें - Car Driving Mistakes: कहीं आपकी ड्राइविंग आदतों के कारण तो नहीं घिस रहे कार ब्रेक? जानिए बचाव का सही तरीका