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ई-बाइक: सरकार ने कम-पावर वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए नए नियम प्रस्तावित किए, मसौदा जारी

Fri, 28 Aug 2026 05:22 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र सरकार कम शक्ति और सीमित गति वाली कुछ दोपहिया बैटरी चालित गाड़ियों को मोटर वाहन की श्रेणी से बाहर रखने पर विचार कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में बदलाव का प्रस्ताव देते हुए इसका मसौदा अधिसूचित किया है।
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Low-speed e-bikes - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम, 1989 में संशोधन का एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत कुछ निश्चित क्षमता वाले कम पावर और कम स्पीड वाले दोपहिया बैटरी चालित वाहनों (Low-Speed E-Bikes) को मोटर वाहन अधिनियम के तहत मोटर वाहन की श्रेणी से बाहर रखा जाएगा।
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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन G.S.R. 760(E) के अनुसार, नए नियम लागू होने के बाद इन वाहनों को पारंपरिक मोटर गाड़ियों के नियमों से छूट मिल सकेगी। सरकार का प्रस्ताव है कि ये संशोधित नियम 1 अक्तूबर 2026 से लागू किए जाएं।

किन मापदंडों को पूरा करने वाले वाहनों को मोटर वाहन नहीं माना जाएगा?

मसौदा नियमों के तहत, किसी दोपहिया बैटरी चालित वाहन को मोटर वाहन नहीं माना जाएगा, यदि निर्धारित परीक्षण एजेंसी यह प्रमाणित करती है कि उसमें लगी इलेक्ट्रिक मोटर की 30 मिनट की शक्ति 0.6 किलोवाट से कम है और उसकी अधिकतम गति 25 किमी प्रति घंटा से कम है।

इस बदलाव का मतलब यह होगा कि निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले कुछ कम पावर और कम रफ्तार वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन मोटर वाहन अधिनियम के दायरे से बाहर हो सकते हैं।

प्रस्तावित परिभाषा के अनुसार:
  • इलेक्ट्रिक मोटर क्षमता: वाहन की 30 मिनट की मोटर पावर 0.6 kW से कम होनी चाहिए।
  • अधिकतम स्पीड सीमित: वाहन की अधिकतम स्पीड 25 किमी प्रति घंटा से कम होनी चाहिए।

पैडल-असिस्टेड ई-बाइक्स के लिए क्या अतिरिक्त शर्तें रखी गई हैं?

सहायक इलेक्ट्रिक मोटर से चलने वाली पैडल-असिस्टेड ई-बाइक्स के लिए ड्राफ्ट में कुछ विशेष तकनीकी दिशा-निर्देश दिए गए हैं:
  • स्पीड कट-ऑफ: मोटर की 30 मिनट की पावर 0.6 kW से कम होनी चाहिए और जैसे ही वाहन 25 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ता है, मोटर की पावर धीरे-धीरे कम होकर पूरी तरह बंद हो जानी चाहिए।
  • पैडलिंग रुकने पर स्वतः बंद: यदि राइडर (साइक्लिस्ट) पैडल मारना बंद कर देता है, तो मोटर का आउटपुट तुरंत कट-ऑफ हो जाना चाहिए।
  • सुरक्षा मानक: इस श्रेणी में आने वाले सभी वाहनों को AIS-049 (Rev.1) के तहत निर्दिष्ट सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस नए प्रस्ताव पर क्या चिंताएं जताई हैं?

प्रस्तावित छूट को लेकर सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने कुछ गंभीर सवाल भी उठाए हैं:
  • सुरक्षा और उम्र संबंधी चिंताएं: नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च के वरिष्ठ सलाहकार और CRRI के पूर्व सड़क सुरक्षा वैज्ञानिक वेलमुरुगन एस. ने चिंता जाहिर की है और कहा कि इन नियमों से छूट मिलने के बाद बच्चे भी इन वाहनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का अभाव: उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर इन वाहनों से कोई गंभीर या जानलेवा दुर्घटना होती है, तो थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की गैर-मौजूदगी में पीड़ित के नुकसान की भरपाई कैसे होगी।
  • हेलमेट अनिवार्यता का सुझाव: उन्होंने सुझाव दिया कि भले ही इन वाहनों को मोटर व्हीकल एक्ट से छूट दी जाए। लेकिन सुरक्षा के लिहाज से कम से कम हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाना बेहद जरूरी है।
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इससे कौन प्रभावित होगा?

  • प्रस्तावित बदलाव ई-साइकिल बनाने वालों, इस्तेमाल करने वालों और कम पावर वाले इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का कारोबार करने वालों के लिए अहम हैं।
  • मैन्युफैक्चरर्स को यह पक्का करना होगा कि छूट पाने के लिए उनके वाहन प्रस्तावित पावर, स्पीड और सुरक्षा मानकों को पूरा करते हों।
  • इस ड्राफ्ट में 30-मिनट की मोटर पावर के मतलब के लिए AIS-049 (Rev.1) और वेरिफिकेशन के तरीके के लिए AIS-041 (Rev.1) का भी जिक्र किया गया है। छूट के दायरे में आने वाले वाहनों को AIS-049 (Rev.1) के तहत सुरक्षा मानकों को भी पूरा करना होगा।
  • प्रस्तावित सेंट्रल मोटर व्हीकल्स अमेंडमेंट रूल्स 1 अक्तूबर, 2026 से लागू होने वाले हैं, बशर्ते आखिरी नियम अधिसूचित होने से पहले उनमें कोई बदलाव न किया जाए।
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